देश में कोरोना के आकड़े

कोरोनावायरस की उत्पत्ति को लेकर दुनियाभर के निशाने पर आया चीन अब अपने बचाव में उतर आया है। कोरोना की उत्पत्ति को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा रही चीन की वुहान लैब के वैज्ञानिकों ने दुनिया के आरोपों को निराधार बताया है।

निर्दोष वैज्ञानिकों पर कीचड़ उछाल रही दुनिया

चीन की ‘बैट वुमन’ के नाम से मशहूर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की डिप्टी डायरेक्टर शी झेंगली ने कहा है कि दुनिया निर्दोष वैज्ञानिकों पर बिना किसी आधार के कीचड़ उछाल रही है। वुहान लैब से कोरोनावायरस की उत्पत्ति का दावा निराधार है। मैं किसी ऐसी चीज के लिए सबूत कैसे पेश कर सकती हूं, जहां कोई सबूत है ही नहीं?

अटकलों में जरा सी भी सच्चाई नहीं

चीन की टॉप वायरोलॉजिस्ट झेंगली ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि वुहान में उनकी लैब के बारे में लगाई जा रहीं अटकलों में जरा सी भी सच्चाई नहीं है। झेंगली वही वैज्ञानिक हैं, जिन पर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ पर लापरवाही से रिसर्च करने का आरोप लगाया गया था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं की लापरवाही से पूरी दुनिया में कोरोना फैला।

वुहान लैब के अंदर जिंदा रखे जाते थे चमगादड़

झेंगली लाख सफाई दे, लेकिन एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने चीन के झूठ की पोल खोलकर रख दी है। चाइना अकादमी ऑफ साइंस के मई 2017 के आधिकारिक वीडियो में चमगादड़ों को पिंजड़े में कैद करके रखा दिखाया गया था। वीडियो में यह भी नजर आ रहा है कि वैज्ञानिक चमगादड़ों को कीड़े खिलाते नजर आ रहे हैं। इस 10 मिनट के वीडियो को पूरी तरह से वुहान लैब के निर्माण पर केंद्र‍ित किया गया है। इसमें कई वैज्ञानिकों के साक्षात्‍कार भी दिखाए गए हैं। जबकि डब्ल्यूएचओ ने वुहान लैब से वायरस लीक होने की खबर को बेबुनियाद और षड्यंत्र करार दिया था।

अमेरिकी सीक्रेट एजेंसी की रिपोर्ट से खड़े हुए सवाल

हाल ही में अमेरिकी सीक्रेट एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वुहान लैब के कई वैज्ञानिक अक्टूबर-नवंबर 2019 में कोरोना संक्रमित पाए गए थे। अगर ये वैज्ञानिक शुरुआत में ही संक्रमित हुए थे, तो इससे वायरस के पैदा होने की जगह का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे खारिज कर दिया था।

दावा- वायरस चीन की लैब से ही निकला

हाल में अमेरिका के 18 वैज्ञानिकों के समूह ने कोरोना की उत्पत्ति की गहराई से जांच करने की मांग रखी थी। इनका मानना है कि वायरस लैब से ही लीक हुआ है। ये सभी वैज्ञानिक सार्स परिवार के वायरस की गहन स्टडी करते रहे हैं। समूह का नेतृत्व कर रहे वायरोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम के मुताबिक, यह स्टडी WHO की टीम के पहुंचने तक चल रही थी। इसलिए टीम को लैब की जांच नहीं करने दी गई। जांच का दिखावा जरूर किया गया।

चीन को घेरने की अमेरिकी रणनीति

इस बीच कोरोना की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए अमेरिका ने कोशिशें तेज कर दी हैं। US प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने अमेरिकी जांच एजेंसी को इसकी बारीकी से जांच करने के लिए कहा है। उन्होंने इस जांच की रिपोर्ट 90 दिनों के अंदर मांगी है। बाइडेन ने जांच एजेंसियों को चीन की वुहान लैब से वायरस निकलने की आशंका को लेकर भी जांच करने को कहा है। उन्होंने जांच एजेंसियों से कहा है कि ये वायरस जानवर से फैला या किसी प्रयोगशाला से, इस बारे में स्पष्ट जांच की जाए।

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