चारधाम यात्रा शुरू हवाई सेवाओं का अता-पता नहीं

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आज श्री गणेश गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ हो जाएगा। लेकिन यहां पर सबसे अहम और खास बात यह है कि चारधाम यात्रा में हवाई सेवाओं को लेकर चीजें अधर में अटकी हुई हैं। अभी तक हवाई सेवाएं कौन सी कंपनियां प्रदान करेंगी ये तय नहीं हो पाया। हांलाकि यूकाडा ने इसको लेकर टेण्डर की प्रक्रिया की थी। जो अभी तक किन कारणों से अधर में अटकी हुई है।

इस बारे में कोई अधिकारी बोलने को तैयार तक नहीं हैं

जहां एक तरफ चारधाम यात्रा को लेकर अब तैयारियां अपने अंतिम दौर पर आ चुकी हैं। लेकिन हवाई सेवाओं को लेकर अभी तक कोई भी तैयारी पूरी होती नहीं दिखाई दे रही है। हांलाकि इस मामले में चर्चा में आया था कि मुख्यमत्री ने अधिकारियों के साथ विदेश यात्रा के पहले चर्चा कर गढ़वाल मंडल विकास निगम को इस बार चारधाम यात्रा में टिकटों की बिक्री का काम देने की बात कही है। विभाग 1 जून से टिकटों की बिक्री की तैयारी जुटा है इसको लेकर एप आदि भी बनाए जा रहे हैं।

ऐसे में बीते सोम वार को सूत्रों की माने तो हवाई सेवाओं को प्रदान करने के लिए आई निविदा पत्रों की टैक्निकल बीट खो दी गई है। इसकी फाइनेंस बीट जल्द खुल सकती है। फिर तय हो जाएगा कि किन विमानन कंपनियों के उड़न खटोले चारधाम के लिए कुलाचे भरेंगे। लेकिन यहां पर कई सवाल हैं, जो कि सरकार की मंशा साफ करते नहीं दिखाई दे रहे हैं। पहला कि यात्रा की शुरूआत होने में महज चंद दिन रह गए और हवाई सेवाओं का अता-पता नहीं है। दूसरा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टिकटों की दलाली और बिचौलिए ना रहें इसके लिए ये काम गढ़वाल मंडल विकास निगम करेगा। साथ ही हवाई सेवाओं की शुरूआत संभवता अप्रैल के अंत से हो जाएगी, और निगम को 1 जून से टिकटों की बिक्री का अधिकार मिलेगा तब तक टिकटों की बिक्री केवल विमानन कंपनियां ही करेंगी।

ऐसे में क्या 1 जून से कोई टिकट बचेगा, जिसकी बिक्री हो सकेगी

इसके साथ ही इस बार यात्रा में हवाई सेवाओं का किराया बढ़ सकता है। इसके भी आसार साफ नजर आ रहे हैं। बीते साल हवाई सेवाओं के लिए 7 हजार रूपये देने होते थे। लेकिन इस साल इससे ज्यादा देना पड़ सकता है। अगर देखा जाए जो हवाई सेवाओं को लेकर किराए के दामों में भारी अन्तर देखने को मिलता है। अगर हम देहरादून से दिल्ली की सेवा लेते हैं तो हमें महज 2500 से 3500 तक देना पड़ता है। जबकि चारधाम में केदारनाथ या बद्रीनाथ जाने के लिए ये खर्च महज 7000 होता है। इस बावत जब पर्यटन मंत्री सतपाल से बात हुई तो उन्होने भी कहा ये सही है लेकिन अन्य सेवाओं में बोइंग विमान हैं। जहां पर 40 से 50 सीटें है।

वहीं हेलीकॉप्टर में 5 से 6 यात्री होते हैं तो खर्च ज्यादा है। लेकिन इसमें आने वाले श्रद्धालु की जेब पर पड़ने वाले खर्च या भार को ना तो पर्यटन विभाग देख रहा है और ना ही नागरिक उड्डयन विभाग यहां पर केवल अब हवाई सेवाओं के जरिए एक नया खेल खेला जा रहा है। वहीं उड्डयन विभाग के सूत्रों की माने तो इस साल होनी वाली यात्रा के टिकटों की बिक्री विमानन कंपनियां ही करेंगी क्योंकि गढ़वाल मंडल विकास निगम के पास अभी तैयारी नहीं है। आखिर इतनी बड़ी यात्रा होने को है और सरकार के पास कोई तैयारी हवाई सेवाओं के मार्फत नहीं है। ना ही रूपरेखा अब इस बारे में जब सवाल उठेंगे तो जबाव कौन देगा।

 अजस्र पीयूष शुक्ला