ilaaj कर्मचारियों के इलाज से जुड़ा यह मुद्दा फिर गरमाया

लखनऊ। सरकारी कर्मचारियों के इलाज से जुड़ा मुद्दा एक फिर गरमा गया है। इस बार यह सदन के पटल पर भी पहुंचा है। जिसके बाद कर्मचारियों में एक बार और उम्‍मीद की अलख जगी है।

राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद के अध्‍यक्ष हरि किशोर तिवारी ने बताया कि कैशलेस इलाज को लेकर हम लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसको लेकर नियमावली भी बनी हुई है। साथ ही कैबिनेट से भी जारी हो चुका है। लेकिन इसका लाभ अभी तक मिलना शुरू नहीं हुआ है।

हरि किशोर तिवारी ने कहा कि यूपी के राज्य कर्मचारियों को कैशलेस इलाज के लिए उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय दिया गया था। जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट से भी जारी होकर नियमावली भी बनी।

hari kishor tiwari कर्मचारियों के इलाज से जुड़ा यह मुद्दा फिर गरमाया

राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद के अध्‍यक्ष हरि किशोर तिवारी

साथ ही सरकार ने इसका आदेश भी जारी कर दिया। हरि किशोर तिवारी ने अपर मुख्‍य सचिव वित्‍त पर मनमानी का आरोप मढ़ते हुए कहा कि यह कर्मचारियों का अधिकार है। इसके बाद भी यह कार्यान्वित नहीं हो सका है।

उन्‍होंने कहा कि सरकार ने इसका नाम बदलते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय राज्‍य कर्मचारी कैशलेस योजना रख दिया है। लेकिन अधिकारियों की मनमानी की वजह से इसका लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है।

सदन में उठा मुद्दा

श्री तिवारी ने बताया कि विधान परिषद सदस्‍य आकाश अग्रवाल ने इसको सदन में उठाया है। जिस पर प्रमुख सचिव ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से जवाब मांग लिया है। जल्‍द ही अधिकारियों को इस संबंध में जवाब देना होगा।

क्‍या है कैशलेस इलाज योजना

हरि किशोर तिवारी ने बताया कि कैशलेस योजना हम कर्मचारियों के बेहद अहम है। इसको अखिलेश सरकार की अंतिम कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इस योजना का लाभ यह है कि अब हमें भागदौड़ नहीं करना होगा। सरकार सीधे अस्‍पतालों को भुगतान करेगी।

उन्‍होंने बताया कि अभी तक की जो योजना है उसके अनुसार कर्मचारी अपने इलाज के बाद रिंबर्समेंट के लिए फॉर्म भरता है। इलाजके बाद वह अपने पास से अस्‍पताल का भुगतान करता है। फिर वह अस्‍पताल से पूरी डिटेल निकालता है, उसके बाद संबंधित चिकित्‍सा अधिकारी से अप्रूव कराता है।

तब जाकर सरकार उसे भुगतान करती है। ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों को कई बार भागदौड़ करनी पड़ जाती है। इससे न सिर्फ उनका समय बर्बाद होता है बल्कि कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

उन्‍होंने बताया कि कैशलेस इलाज योजना के तहत कर्मचारी अब अस्‍पताल में भर्ती होगा और इलाज कराकर घर आ जाएगा। इलाज का जितना खर्च होगा, सरकार खुद अस्‍पताल को भुगतान करेगी।

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