कैंडिडा ऑरिस: एक ऐसा फंगस जो रोगी के मरने के बाद भी नहीं मरता, मात्र तीन महीने में ले लेता है जान

कैंडिडा ऑरिस: एक ऐसा फंगस जो रोगी के मरने के बाद भी नहीं मरता, मात्र तीन महीने में ले लेता है जान

एजेंसी, नई दिल्ली। दुनिया में इन दिनों एक रहस्यमयी फंगस लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। चिंता की बात तो यह कि ना तो इस फंगस का कोई इलाज है और ना ही मनुष्य की मौत के बाद यह नष्ट हो रहा है, बल्कि एक मनुष्य के शरीर से यह दूसरे के शरीर में फैल रहा है। इस खतरनाक फंगस का नाम है ‘कैंडिडा ऑरिस’। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक ‘कैंडिडा ऑरिस’ फंगस की चपेट में आने से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
इम्यून सिस्टम कमजोर है तो आ जाओग चपेट में
यह फंगस उन लोगों को अपना शिकार बनाता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल मई माह में ‘कैंडिडा ऑरिस’ का पहला मरीज ब्रुकलिन में मिला था। यहां के माउंट सिनाई हॉस्पिटल फॉर ऐब्डॉमिनल सर्जरी में एक बुजुर्ग व्यक्ति भर्ती हुआ था जिनके ब्लड टेस्ट में यह बात पता लगी थी कि वो एक रहस्यमयी फंगस से पीड़ित हैं। इसके बाद उन्हें डॉक्टरों ने इन्टेन्सिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया था। बुजुर्ग की मौत के बाद इस फंगस से ग्रसित कई लोग सामने आए।
पिछले पांच सालों में वेनेजुएला और स्पेन के कुछ अस्पतालों में इस फंगस से ग्रसित लोगों के कई मामले सामने आए। जिस कारण एक ब्रिटिश मेडिकल सेंटर को अपनी इन्टेन्सिव केयर यूनिट तक बंद कर देनी पड़ी थी। यूएस और यूरोप के बाद अब इस फंगस ने एशियाई देशों का रुख किया है। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रिका में भी इस फंगस से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट में तो यह भी कहा जा रहा है कि व्यक्ति की मौत के साथ यह फंगस मरता ही नहीं है। क्योंकि माउंट सिनाई हॉस्पिटल में भर्ती कैंडिडा ऑरिस से ग्रसित जिस बुजुर्ग की मौत हो गई थी उसकी मौत के बाद भी कैंडिडा ऑरिस नाम का वायरस मिला था। अस्तपाल के प्रबंधक डॉ स्कॉट लॉरिन के अनुसार, बुर्जुग की मौत के बाद हमें दीवारें, बिस्तर, दरवाजे, पर्दे, फोन, सिंक, वाइटबोर्ड, चादर, बेड रेल में कैंडिडा ऑरिस मिला था। डॉ स्कॉट लॉरिन का कहना है कि कैंडिडा ऑरिस इतना खतरनाक है कि इस पर ऐंटीफंगल मेडिकेशन का भी असर नहीं होता। एक समस्या यह भी है कि लोगों को इस फंगस के बारे में कम जानकारी है क्योंकि इसे गोपनीय बनाकर रखा गया है।
इस पर अब तक दवाएं नहीं बन पाई हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरकारें इस बात से डरती हैं। अब तक कई मामले ऐसे सामने आए हैं जिसके कारण कैंडिडा ऑरिस फंगस से 90 दिन के अंदर मरीज की मौत हो जाती है। अस्पताल में मौजूद लोगों, उपकरणों समेत अन्य चीजों के आयात-निर्यात से भी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता जा रहा है। डॉ मैथ्यु मैककार्थी बताते हैं कि इस फंगस की चपेट में आने से मरीज को बुखार, दर्द और कमजोरी होती है। इसके अलावा जिस किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उसे तो यह फंगस अपनी चपेट में आसानी से ले लेता है। फिलहाल इस फंगस का तोड़ ढूंढने के लिए रिसर्च की जा रही है।