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अलविदा 2017: अतंर्राष्ट्रीय कोर्ट में भारत को साल 2017 में मिली थी ये कामयाबी

WhatsApp Image 2017 12 27 at 2.40.21 PM अलविदा 2017: अतंर्राष्ट्रीय कोर्ट में भारत को साल 2017 में मिली थी ये कामयाबी

नई दिल्ली। साल 2017 भारत के लिए कई मायने में महत्वपूर्ण रहा है। इस साल भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई कामयाबी मिली है। इसी कड़ी में कुलभूषण जाधव मामले में भारत को अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जीत और पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल भारतीय मूल के ईरानी व्यापारी कुलभूषण जाधव गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान ने उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट बताकर गिरफ्तार कर लिया। पाकिस्तान  ने कुलभूषण को कुछ बोलने ही नहीं दिया और वो उसे सीधा जेल ले गए और इसके बाद सैन्य अदालत में। जहां पाकिस्तान ने कुलभूषण को रॉ का एजेंट बताते हुए कहा कि ये इंसान पाकिस्तान की खुफिया जानकारियों को चुराने आया था। इस दलील को सुनकर कोर्ट ने न आओ देखा न ताओ और 10 अप्रैल 2017 को कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुना दी।

इस मामले का पता जब भारत को चला की पाकिस्तान ने एक निर्दोष भारतीय को रॉ का एजेंट बताकर फांसी की सजा सुना दी है तो कुलभूषण को बचाने के लिए भारत सरकार ने इस फैसले को अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद 15 मई को कुलभूषण जाधव मामले में भारत की अपील के बाद अतंर्राष्ट्रीय कोर्ट ने सुनवाई शुरू की। इस दौरान भारत की पैरवी कर रहे अटर्नी हरीश साल्वे ने कहा था कि जाधव को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और कोंसुलर उपलब्ध करवाए जाने के अलावा 16 अपीलों को नजरअंदाज करते हुए फांसी की सजा सुना दी गई। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक सुनवाई के दौरान भारत ने कहा था कि कुलभूषण को अपना पक्ष रखने के लिए कानूनी अधिकार मिलना चाहिए। हरीश साल्वे ने कहा था कि जाधव पर उन बयानों के आधार पर आरोप तय किए गए, जो उन्होंने पाकिस्तानी सेना के कैद में दिए थे।WhatsApp Image 2017 12 27 at 2.40.21 PM अलविदा 2017: अतंर्राष्ट्रीय कोर्ट में भारत को साल 2017 में मिली थी ये कामयाबी

भारत ने इस दौरान अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हम चाहते है कि आईसीजे फांसी पर रोक को तब तक जारी रखे जब तक मामले की विधिवत सुनवाई नहीं होती। भारत की इस दलील को मानते हुए अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी।  बता दें कि भारत आम तौर पर पाकिस्तान के साथ किसी भी मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत तक ले जाने से बचता है, लेकिन कुलभूषण जाधव के मामले में उसने आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। हेग की अदालत में इस मामले की सुनवाई 11 जज कर रहे थे। भारत की अपील पर अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट द्वारा कुलभूषण की फांसी की सजा पर रोक लगाना भारत के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी थी। इसके बाद इस मामले में पूरे साल खबरों का दौर लगातार जारी रहा था।

वहीं भारत की अपील के बाद पाकिस्तान ने 25 दिसंबर को कुलभूषण से उसकी मां और पत्नी को मिलने की इजाजत दे दी। हालांकि, भारत ने इससे पहले पाकिस्तान से साफ शब्दों में कह दिया था कि जब तक पाकिस्तान जाधव के घर वालों की सुरक्षा के इंतजाम की पूरी जानकारी नहीं दे देता तब तक जाधव के परिवार वाले उससे मिलने के लिए पाकिस्तान नहीं जाएंगे। इसके बाद करीब एक महीने तक चली  इस प्रक्रिया के बाद पाकिस्तान ने जाधव के परिवार वालों की सुरक्षा की पूरी जानकारी भारत को उपलब्ध करा दी और भारत ने जाधव के परिवार वालों को पाकिस्तान में उससे मिलने की इजाजत दे दी।

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