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By-Election 2021: देश में 3 लोकसभा व 29 विधानसभा सीटों पर वोटिंग शुरू, जानिए किन पर टिकी नजर

28 09 2021 himachal by election 22062576 11228291 By-Election 2021: देश में 3 लोकसभा व 29 विधानसभा सीटों पर वोटिंग शुरू, जानिए किन पर टिकी नजर

उपचुनाव 2021: देश में 3 लोकसभा और 29 विधानसभा सीटोंपर होने वाले उपचुनाव के लिए शनिवार को मतदान शुरू हो गया है। मतदान प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के साथ ही कोविड बचाव उपाय भी सुनिश्चित किए गए हैं। अधिकतर सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होगा।

दादरा व नगर हवेली, हिमाचल प्रदेश के मंडी और मध्य प्रदेश के खंडवा में लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होगा। वहीं, जिन 29 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होगा, उनमें असम की पांच, बंगाल की चार, एमपी, मेघालय और हिमाचल की तीन-तीन, राजस्थान, बिहार और कर्नाटक की दो-दो, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना की एक-एक सीट शामिल हैं. सभी सीटों पर आज ही वोट पड़ेंगे और फिर 2 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

बंगाल में भाजपा के लिये प्रतिष्ठा की लड़ाई
बात अगर पश्चिम बंगाल की चार विधानसभा सीटों की करें तो सबकी निगाहें दिनहाटा सीट पर होंगी क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता उदयन गुहा इस सीट पर फिर से जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अप्रैल में हुए चुनाव में भाजपा ने उनसे छीन ली थी। दो बार विधायक रह चुके गुहा ने 2011 में फॉरवर्ड ब्लॉक और 2016 में टीएमसी के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की थी। इस बार उनका मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार अशोक मंडल से है, जिन्होंने 2006 में टीएमसी उम्मीदवार के तौर पर उन्हें हराया था।
इनके अलावा जिन तीन सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें नदिया जिले की शांतिपुर, उत्तर 24 परगना की खरदा और दक्षिण 24 परगना की गोसाबा सीट शामिल है। दिनहाटा और शांतिपुर उपचुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है, जो वर्तमान में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के पार्टी बदलने की समस्या से जूझ रही है।

मध्य प्रदेश में सबसे कड़ी टक्कर
मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। एक तरफ खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मैदान पर उतर लगातार रैलियां की हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी लगातार प्रचार करती दिख गई।
मध्य प्रदेश में लोकसभा की एक एवं विधानसभा की तीन सीट पर उपचुनाव के लिए कुल 48 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच है। इन चार सीटों में से खंडवा लोकसभा सीट सहित दो सीटों पर भाजपा का कब्जा था, जबकि बाकी दो सीट कांग्रेस के पास थीं।
वहीं, मध्य प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा के चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक और राज्य के मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने दावा किया है कि भाजपा चारों सीटें जीतेगी। मध्य प्रदेश में खंडवा लोकसभा सीट के साथ रैगांव, पृथ्वीपुर और जोबट विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। इन चार सीटों में से दो भाजपा और दो कांग्रेस के पास थीं, लेकिन प्रतिनिधियों के के निधन से ये सीटें खाली हो गई थीं। खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा के ज्ञानिश्वर पाटिल और कांग्रेस के राजनारायण सिंह पुरनी के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है।

हिमाचल में अगले साल विधानसभा चुनाव की पूर्व परीक्षा हैं उपचुनाव
हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों अर्की, फतेहपुर तथा जुब्बल-कोटखाई के साथ-साथ मंडी लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं। राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की पूर्व परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं के अनुसार, इन उप चुनाव के परिणाम अगले साल दिसंबर में होने वाले विधानसभा के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। मंडी लोकसभा सीट में 17 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। वहीं, मंडी लोकसभा सीट पर से एक ओर कांग्रेस पार्टी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारा है, तो वहीं भाजपा ने कारगिल के मैदान में वीरता दिखाने वाले ब्रिगेडियर कुशल सिंह ठाकुर को खड़ा कर दिया।
भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा कि इस उप चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित करेंगे। इन चारों सीट पर उप चुनाव, मौजूदा सांसद और विधायकों के निधन के चलते कराए जा रहे हैं। इन सभी सीटों के लिए मतगणना दो नवंबर को की जाएगी।

तेलंगाना में राजेंद्र के लिए करो या मरो की स्थिति
उधर तेलंगाना में हजूराबाद विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां पूरी हो गई हैं और इस चुनाव में सत्तारूढ़ टीआरएस, विपक्षी भाजपा एवं कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। जून में इटाला राजेंद्र के इस्तीफे के बाद हजूराबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत उत्पन्न हुई। उन्होंने जमीन हथियाने के आरोपों के बीच मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाये जाने के बाद विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था।
आरोपों से इनकार कर चुके राजेंद्र ने टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति)से नाता तोड़ लिया और अब वह भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। इस उपचुनाव में 30 प्रत्याशी हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला टीआरएस के गेल्लू श्रीनिवास यादव, भाजपा के राजेंद्र और कांग्रेस के वेंकट बालमूरी के बीच है।
इश बार राजेंद्र के लिए यह उपचुनाव ‘करो या मरो’ जैसा है और उनकी पार्टी के लिए भी बड़ा अहम है जो 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले टीआरएस के विकल्प के रूप में उभरने का लक्ष्य लेकर चल रही है। मतगणना दो नवंबर को होगी।

राजस्थान में दिलचस्प मुकाबला
राजस्थान में वल्लभनगर और धरियावद विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। वल्लभनगर विधानसभा सीट पर इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा, कांग्रेस के साथ जनता सेना और आरएलपी मैदान में हैं। वल्लभनगर में कुल 9 उम्मीदवार मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

बिहार में 2 सीटों से तय होगा सरकार का भविष्य
दूसरी ओर बिहार में राजद और कांग्रेस दोनों शनिवार को 2 सीटों तारापुर (मुंगेर) और कुशेश्वर अस्थान (दरभंगा) पर विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं। जनता दल (यूनाइटेड), जिसने पिछले विधानसभा चुनावों में दोनों सीटें जीती थीं, ऐसे में उसके लिए यह चिंता का कारण है क्योंकि राज्य विधानसभा में एनडीए के पास कम बहुमत है। दोनों सीटें हारने से राजद को राज्य सरकार का समर्थन करने वाले छोटे दलों के साथ बातचीत करने का मौका मिल सकता है। जदयू ने हाल ही में पेगासस मामले की जांच की मांग करने और प्रतिद्वंद्वी राजद की जाति जनगणना की मांग को भी प्रमुखता दी थी।

असम में भी पांच विधानसभा सीटों पर वोटिंग
नार्थ ईस्ट राज्यों में असम में भी चुनावी सरगर्मी देखने को मिल रही है। यहां पर पांच सीटों पर वोटिंग होनी है। वो सीटे हैं- गोसाईगांव, भवानीपुर, तमुलपुर, मरियानी और थौरा। अब इन पांच सीटों में से तीन पर बीजेपी ने अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। वहीं, 2 सीटों पर सहयोगी पार्टी यूपीपीएल को चुनाव लड़ने दिया है। कांग्रेस की बात करें तो पार्टी ने सभी पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। असम की इन सीटों को बीजेपी ने काफी तवज्जो दी है। इसी वजह से खुद सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जमकर प्रचार किया। वहीं कांग्रेस के लिए ये जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने संभाली।

कर्नाटक चुनाव में भाजपा के लिए जीत महत्वपूर्ण
कर्नाटक की दोनों विधानसभा सीटें- हनागल और सिंदगी, लिंगायत बहुल उत्तर कर्नाटक में हैं। लिंगायत राज्य में सबसे बड़ा समुदाय है। यह चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हनागल लिंगायत नेता बसवराज बोम्मई के गृह जिले की ही सीट है। उन्होंने जुलाई में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बीएस येदियुरप्पा की जगह ली थी। येदियुरप्पा को राज्य का सबसे लंबा लिंगायत नेता माना जाता है। येदियुरप्पा भी बोम्मई के साथ प्रचार कर रहे थे।

ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला
हीं, हरियाणा के सिरसा जिले के ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को होने वाले उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के उम्मीदवार अभय सिंह चौटाला की नजरें एक बार फिर इस सीट पर जीत हासिल करने पर टिकी हैं। चौटाला ने केंद्रीय कृषि कानूनों के मुद्दे पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते इस सीट पर उपचुनाव की जरूरत पड़ी है। हरियाणा लोकहित पार्टी के प्रमुख तथा विधायक गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा ने हाल में भाजपा का दामन थाम लिया था। वह इस सीट पर भाजपा-जजपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं।

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