बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त के साथ जाने महात्मा बुध्द के रोचक तथ्य

नई दिल्ली। हिंदू धर्म के लिए बुद्ध पूर्णिमा का एक विशेष महत्व है जिसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल यानी सोमवार को पड़ रही है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। महात्मा बुध्द ने आज ही के दिन बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे बुद्धत्व हासिल किया था। महात्मा बुद्ध ने आज ही के दिन यूपी के गोरखपुर से कुशीनगर में महानिर्वाण के लिए प्रस्थान किया था।

बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले देश

इसलिए जो लोग बौद्ध धर्म में आस्था रखते है उनके लिए बुद्ध पूर्णिमा बहुत ही खास हो जाती है। बौद्ध धर्म के अनुयायी पूरी दुनियाभर में फैले हुए है। मुख्य रुप से श्रीलंका, चीन, कंबोडिया, वियतनाम, थाईलैंड, नेपाल, मलयेशिया, म्यांमार और इंडोनेशिया प्रमुख देशों में से जहां काफी संख्या में बौद्ध धर्म के अनुयायी पाए जाते हैं।

क्या है शुभ मुहूर्त:

इस साल बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल (सोमवार) को पड़ रही है जिसका शुभ मुहूर्त 29अप्रैल को सुबह 6:37 बजे से शुरू हो रहा है और यह 30 अप्रैल 2018 को 6:27 बजे पर खत्म होगा।

विष्णु जी का 9वां अवतार

हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भगवान बुद्ध का विशेष महत्व है जिन्हें विष्णु जी के 9वें अवतार के रुप में बताया गया है। इसलिए हिंदू धर्म के लोगों के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। बुद्ध पूर्णिमा या वैशाख पूर्णिमा के दिन तमाम हिंदू व्रत रखते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन गंगा में नहाना काफी शुभ माना जाता है। कहते हैं कि वैशाख पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को उसके पाप कर्मों से छुटकारा मिलता है। व्यक्ति अधर्म छोड़कर धर्म के कार्यों में लग जाता है।

इस दिन लोग मुख्य रुप से सफेद वस्त्रों को धारण करते हैं। ये लोग बौद्ध विहारों या मठों में एकजुट होते हैं। इसके बाद सामूहिक रूप से भगवान बुद्ध की आराधना करते हैं। इन धर्मावलंबियों के बीच बुद्ध  द्वारा दिए गए ज्ञान को साझा किया जाता है। ये सभी अनुयायी बड़ी ही श्रद्धा के साथ उस ज्ञान को सुनते हैं और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं।

महात्मा बुध्द के बारें में रोचक तथ्य

महात्मा बुध्द का जन्म 563 ईसा पूर्व में नेपाल के लुंबिनी में हुआ था।

महात्मा बुध्द के बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

महात्मा बुध्द का विवाह यशोधरा के साथ हुआ था और उन्होंने अपने बेटे राहुल के जन्म के एक साल बाद ही अपना घर त्याग दिया था

महात्मा बुध्द को बिहार के गया में ज्ञान की प्रप्ति हुई और तभी से बुद्ध पूर्णिमा का आगाज हुआ और इसी के साथ  महात्मा बुध्द बौध्द धर्म के संस्थापक बन गए।