fe Naidu 2 राष्ट्रपति के चुनिंदा भाषणों की पुस्तकें उनकी ज्ञान धारा का संकलन हैं: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सामाजिक बुराईयों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अश्पृश्यता तथा लैंगिग भेदभाव जैसी सामाजिक बुराईयों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध आसाधारण प्रतिभा, विचारों और नवाचारी क्षमताओं को एक साथ लाने की आवश्यकता है ताकि समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केन्द्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के चुनिंदा भाषणों पर दो पुस्तकों ‘द रिपब्लिकन एथिक’ (खंड-2) तथा ‘लोकतंत्र के स्वर’(खंड-2) का विमोचन कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां से वह प्रमुख चुनौतियों और बाधाओं का सामना करते हुए समावेशी विकास की दिशा में छलांग लगा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों और नीतियों को बनाए रखना लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की और मेरी सोच एक समान है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अनेक अवसर पर राष्ट्रपति के संबोधनों में राष्ट्र का सार, विज़न, महत्वकांक्षा, आशाओं और स्वभाव को देखा है। उनमें विचारों की स्पष्टता है, विश्लेषण करने की क्षमता है। माननीय राष्ट्रपति के सभी भाषणों में, चाहे वह राष्ट्र के नाम संबोधन हो या विदेश यात्राएं हो या शिक्षा की बात हो, सभी में तालमेल देखने को मिलता है।

नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति हमेशा हमें अन्नदाताओं यानी किसानों, वैज्ञानिकों, पेशेवर लोगों और बहादुर जवानों के योगदान की याद दिलाते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषणों में बार-बार शिक्षा की बात होती है। उनके लिए शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है। वह चाहते हैं कि हमारे विश्वविद्यालय नए भारत की दिशा में प्रगति का पावर हाउस बनें। वह वैज्ञानिक संस्थानों से आशावान रहते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक वकील के नाते राष्ट्रपति वकालत पेशे की शक्तियों और चुनौतियों के प्रति सचेत हैं। राष्ट्रपति संवैधानिक तौर-तरीकों से सामाजिक परिवर्तन में विश्वास रखते हैं।

राष्ट्रपति कोविन्द गरीब से गरीब लोगो को न्याय प्रदान करने में कानूनी पेशे की क्षमता पर बल देते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अधिकारियों से उच्च स्तर के संकल्प की आशा रखते हैं, क्योंकि अधिकारी लोगों को लोकतांत्रिक संविधान के फल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कोविन्द ने विभिन्न सेवाओं के सैकड़ों युवा अधिकारियों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के चुने हुए भाषणों की पुस्तकें उनकी ज्ञानधारा का संकलन हैं।

देश की संप्रभुता की रक्षा के प्रति भारत के संकल्प पर पुस्तक से उद्धरण पेश करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने हमेशा शांति और सहयोग के मूल्यों का पालन किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर आक्रमण करने वालों को माकूल जवाब दिया जाएगा। उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के भाषणों के संकलन को प्रकाशित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और उनकी टीम को बधाई दी।

इस अवसर पर पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, सूचना और प्रसारण सचिव अमित खरे तथा प्रकाशन विभाग की प्रधान महानिदेशक श्रीमती साधना राउत तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

Trinath Mishra
Trinath Mishra is Sub-Editor of www.bharatkhabar.com and have working experience of more than 5 Years in Media. He is a Journalist that covers National news stories and big events also.

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