जन्मदिन विशेषः फकीर से प्रेरणा पाकर रफी ने छू ली वो ऊंचाईया….

जन्मदिन विशेषः फकीर से प्रेरणा पाकर रफी ने छू ली वो ऊंचाईया….

मुंबई। मोहम्मद रफी का आज 93वां जन्मदिन है। गूगल ने सुरों के सरताज और गीत के बेताज बादशाह रफी को सपेशल डूडल बना कर जन्मदिन पर श्रदेधांजलि दी है। फिल्मों में रफी के गाने किसी जादू से कम नहीं थे। आवाज में कभी दर्द तो कभी खनक पर हर गाना दिल को छू जाने वाला। उनके जन्मदिन पर आईए जानते हैं उनकी जिंदगी और करियर के कुछ किस्से।

 

मोहम्मद रफी का जन्म पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था. रफी साहब को संगीत की प्रेरणा एक फकीर से मिली जो उनकी जिंदगी की सबसे दिलचस्प बातों में से एक है।रफी की गाने की प्रेरणा की शुरुआत बड़ी अनोखी है।रफी अपने बड़े भाई की दुकान से होकर गुजरने वाले एक फकीर का पीछा किया करते थे जो उधर से गाते हुए जाया करता था।रफी को उसकी आवाज अच्छी लगती थी और वो उसकी नकल किया करते थे। यहीं से संगीत की तरफ उनकी दिलचस्पी बढ़ी।

रफी ने गाने में वो जादूई करिश्मा दिखाया जिसे दोबोरा बना पाना किसी भी गायक के लिए नामुमकिन है। रफी साहब ने शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, जीतेन्द्र, ऋषि कपूर और किशोर कुमार पर फिल्माए गानों को अपनी आवाज दी।रफी साहब ने गुरु दत्त, दिलीप कुमार,जॉनी वॉकर को भी अपनी आवाज दी।

रफी को मुंबई आने का न्यौता संगीतकार श्याम सुंदर ने दिया थी जब रफी सिर्फ 13 साल के थे।1 जुलाई 1980 को आवाज के महान जादूगर मोहम्मद रफ़ी को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए। लेकिन वह आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में पहले की तरह ही जीवित हैं।उनके जैसा फनकार ना कभी हुआ है और ना कभी होगा।