गांव पहुंचा नक्सली हमले में शहीद का शव

मंझौल। शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पे मरने वालों का यही बांकि निशान होगा जैसे अल्लामा इकबाल के शायरी को मंझौलवासियों ने बीते शुक्रवार को चरितार्थ कर दिखाया। जब छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला में मंझौल के लाल बीएसएफ जवान शहीद अमरेश कुमार के सम्मान में मंझौल बाजार पूरी तरह से बंद कर दिया। सुबह से सभी दुकानों पर ताले लटके रहे। हजारों की संख्या में मंझौलवासी पार्थिव शरीर के पहुंचने के इंतजार में सड़कों पर इंतजार करते दिखे।

बता दें कि सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक लोग एक-दूसरे से पार्थिव शरीर पहुंचने की जानकारी लेने के लिए बेताब दिखे। पार्थिव शरीर पहुंचते ही मानो जैसे पूरा मंझौल रो पड़ा हो। बुढ़े,जवान,पुरुष,महिलाएं एवं बच्चों से सड़कें पटी रही। सिउरी पुल से मंझौल के शताब्दी मैदान तक पार्थिव शरीर के इंतजार में लोग घंटों सड़क किनारे खड़े रहे।

वहीं जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर मंझौल पहुंचा। लोगों ने फुलों की वर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं शहीद के सम्मान में विभिन्न विद्यालयों के बच्चे हाथ में तिरंगा झंडा के साथ सलामी देने एवं शहीद की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे।