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छोटी-छोटी बातों पर नादान दिल उठा रहे बड़ा कदम

death well 2676820 835x547 m छोटी-छोटी बातों पर नादान दिल उठा रहे बड़ा कदम
  • लॉकडाउन में सीडब्ल्यूसी के सहयोग से चाइल्डलाइन ने बिछड़े बच्चों को पहुंचाया घर
केस- वन : पिता ने डांटा तो छोड़ दिया घर
  • जिला रायबरेली के बछरांवा कस्बे का 14 वर्षीय किशोर चाइल्ड लाइन टीम को छह महीने पहले पाॅलिटेक्निक चौराहे पर मिला था। काउंसलिंग में पता चला कि वह पढ़ाई मे कमजोर था, इसलिए उस मन पढ़ाई के अलावा अन्य चीजों पर था। उसके पिता खेतीबाड़ी हैं। स्कूल न जाने पर नाराज पिता ने उसको डांट दिया था। पिता की फटकार को जहन मे रखकर वह घर छोड़कर भाग आया था। पुलिसकर्मियों ने उसे इधर-उधर भटकते हुए देखा तब उसे फौरन चौकी पर बैठा लिया। फिर उससे जबाव तलब करते रहे लेकिन वह किशोर के मां-बाप के बारे में जानकारी जुटा नही सके। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने चाइल्ड लाइन से संपर्क कर टीम को चौकी पर बुला लिया। इसके बाद टीम उसे अपने साथ ले गई। जहां टीम ने किशोर से मिली जानकारी पर उसके परिजनों से संपर्क किया। फिर  सीडब्यूसी( चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी) के समक्ष पेश कर काउंसलिग करवाई।
केस दोघर गई तो जबरन करा दी जाएगी शादी
  • बीते 20 मार्च को हुसैनगंज थाना पुलिस को रविन्द्रालय के पास से 15 वर्षीय बिहार की एक नाबालिग बेटी भटकती हुई मिली थी। इस दौरान पुलिस ने लड़की के बारे में चाइल्ड लाइन को जानकारी दी। काउंसिलिंग में लड़की ने बताया कि वह बिहार की रहने वाली है। उसके मां-बाप कम उम्र में उसकी शादी करना चाहते है। जिस वजह से वह घर छोड़कर भाग आई। अब घर नहीं जाना चाहती है। टीम ने सूचना देकर बिहार से उसके मां-बाप को बुलाया। फिर लड़की को सीडब्यूसी के समक्ष पेश किया गया। इस दौरान लड़की ने मां-बाप के साथ जाने से इंकार कर दिया था। मजिस्ट्रेट के सामने उसके पिता ने उसकी शादी करने से मना कर दिया। तब जाकर नाबालिक अपने घर वालों के साथ बिहार लौट गई।
केस- तीन : बहुत डांटते पिता
  • फरवरी में बारबंकी के हैदरगढ़ कस्बे का 16 वर्षीय किशोर नाका पुलिस को फुटपाथ पर सोता हुआ मिला था। फिर पुलिस ने उसे चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दिया था। जब काउंसलिंग कराई गई तो पता चला कि वह स्कूल की छुट्टी के बाद एक दुकान पर काम करता था। जब उसके पिता को यह बात पता चली तो उसे बहुत डांटा। लेकिन पैसा कमाने की चाहत में वह घर से भाग आया।  इसके बाद चाइल्ड लाइन से उसे समझा-बुझाकर परिजनों तक पहुंचा दिया।

लखनऊ। फासले भर ही चला था गलत, राह-ए-शौक में, मंजिल ताउम्र मुझको तलाशती रही…अब्दुल हमीद अदम का शेर बच्चों के मर्म को उस वक्त उकेर देता है, जब  घर छोड़ने का एहसास उन्हें होता है। कि इस भीड़ में सारे रिश्ते छोड़कर वो खुद को अकेला महसूस करते हैं। यह बात हम नहीं बल्कि, चाइल्ड लाइन के आंकडे बता रहे हैं। जनवरी 2019 से अब तक सिटी चाइल्ड लाइन को शहर के फुटपाथ, गली-मोहल्लों से 380 बच्चे भटकते हुए मिले। जिनमें ज्यादातर मां-बाप की डांट पर घर से भागकर आ गए थे। चाइल्ड लाइन ने काउंसलिंग के बाद 316 बच्चों को सही सलामत घर पहुंचाया। वहीं 55 बच्चे ऐसे है जोकि मानसिक रूप से दिव्यांग और नवजात शामिल हैं। जिनके घर और मां-बाप ट्रेस नही हो सके हैं। वे अब शेल्टर होम में हैं।

रेलवे चाइल्ड लाइन को साल भर में मिले इतने बच्चे 
  • पूर्वोत्तर रेलवे पर मिले बच्चे

296 बच्चे घर छोड़कर रेलवे प्लेटफार्म पर मिले

247 बच्चों को चाइल्ड लाइन में पहुंचाया घर

49 बच्चों को शेल्टर होम हैं, जो ट्रेस नहीं हो सके

  • उत्तर रेलवे पर मिले बच्चे

450 बच्चे घर छोड़कर रेलवे प्लेटफार्म पर मिले

385 बच्चों को चाइल्ड लाइन में पहुंचाया घर

65 बच्चों को शेल्टर होम हैं, जो ट्रेस नहीं हो सके

इन वजहों से घर छोड़ रहे बच्चे

सिटी चाइल्ड लाइन के काउंसलर कृष्णा शर्मा  बताते हैं कि अमूमन बच्चे खुद की पहचान बनाना चाहते हैं, वह अपने पैरेंट्स की पहचान पंसद नहीं करते हैं। वहीं बच्चों का स्वभाव जिद्दी होता है, वह अपनी  जिद को पूरा करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाने से पहले जरा सा भी नहीं सोचते हैं। जबकि पैरेंट्स अपने बच्चे की हर ख्वाहिश को समझते है और उन्हें पूरा करने की कोशिश की करते हैं। वहीं भागती दौड़ती लाइफ में पैरेंट्स अपने बच्चों पर कम ध्यान दे पाते हैं। इसका काफी असर बच्चों पर पड़ता है। बताया कि खासतौर पर पैरेंट्स बच्चों को फ्रैंडली माहौल नहीं दे पाते हैं, जिस वजह से पैरेंट्स बच्चों की बातों को सुनकर भी अनसुना कर देते हैं।

सोशल मीडिया का इफेक्ट

सिटी चाइल्ड लाइन के कांउसलर के मुताबिक, सोशल मीडिया का बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। आमतौर बाॅलीवुड फिल्मों में यह सीन दिखाया जाता है  कि बच्चा घर से भागने के बाद बड़ा आदमी यानि अमीर हो जाता है। इन सीन को देख बच्चे सच मानने लगते है। इस वजह से भी कई बच्चे घर छोड़कर चले जाते है।

हो रही काउंसिलिंग

शहर जो भी बच्चे चाइल्ड लाइन टीम को मिल रहे हैं, उनमें घर से नाराज होकर भागने वालों की संख्या अधिक है। बच्चों की काउंसलिंग कराने के बाद उनका होम ट्रेस हो पाता है।

कृष्ण शर्मासिटी चाइल्ड लाइनकाउंसलर     

चाइल्डलाइन टीम को शहर के फुटपाथ, गली-मोहल्ले से जो भी बच्चे मिल रहें हैं। उनमें कम उम्र के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों को आश्रय देने के बाद इनके मां-बाप को ट्रेस कर बुलाया जाता है। इसके बाद सीडब्ल्यूसी के आदेश बच्चे की सुपुदर्गी पैरेट्स को दी जाती है।

डॉ. संगीता, महिला बाल कल्याण विकास, सदस्य

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