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कोरोना काल में ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ को समझें, हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र कर रहा है काम

immunity vbooster कोरोना काल में 'इम्यूनिटी बूस्टर' को समझें, हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र कर रहा है काम
ankit haldwani कोरोना काल में 'इम्यूनिटी बूस्टर' को समझें, हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र कर रहा है कामअंकित साह, संवाददाता, हल्द्वानी

कोरोना महामारी के इस दौर में खुद की इम्यूनिटी को बढ़ाना ही सबसे कारगर उपाय माना गया है। यह केवल बातें नहीं है इस महासंकट के दौर में आयुर्वेद ने इसे साबित भी किया है। कई लोग आयुर्वेद के जरिए इस महामारी से मुक्त भी हुए हैं।

वन अनुसंधान केंद्र से मिलेगी मदद

किसी भी संक्रमण के दौर में खुद को बचाने में सबसे अहम योगदान होता है आपकी इम्युनिटी का यांनी रोग प्रतिरोधक क्षमता का, यदि आपका इम्यून अच्छा नहीं होगा तो आपको कोई भी बीमारी जल्द अपनी चपेट में ले लेगी।

अब सवाल यह उठता है की आप घर बैठे अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढाएंगे? तो इसके लिए आपको हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र की मदद लेनी होगी….जहाँ जैसे औषधीय प्रजाति के पौधों को विकसित कर संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इम्यून सिस्टम बनाना होगा मजबूत

आजकल ऐसी दवाओं और वनस्पतियों का क्रेज़ बढ़ गया है जो आपके इम्यून को मजबूत बनाते हैं, हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र शुरू से ही वनस्पतियों पर बेहतर शोध करता रहा है।

वनस्पति जगत में एक से एक पौधे हैं जो मानव शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से श्वषन क्रिया के लिए वच, कालमेघ, दम बेल शामिल है जो आपके फेफड़ों को मजबूत और बेहतर प्रक्रिया के लायक बनाते हैं।

ऐसे मजबूत होगा इम्यून सिस्टम

हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र में रेंजर मदन बिष्ट ने हमें बताया कि गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, धृतकुमारी, कासनी, , सर्पगंधा, इम्युनिटी बूस्टर पौधे है, ये पौधे आप घर में उगा कर इनका उपयोग कर सकते हैं, ये पौधे वन अनुसंधान केन्द्र हल्द्वानी में तैयार किए जा रहे हैं।

रेंजर मदन बिष्ट
रेंजर मदन बिष्ट

इम्युनिटी के लिहाज से इन पौधों की डिमांड रोजाना वन अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों के पास आ रही है, दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड की अलग अलग जगहों से आ रही इन पौधों की डिमांड के चलते इन पौधों को वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी की नर्सरी में तैयार किया जा रहा है।

लॉक डाउन के बाद इन 7 से 8 प्रजातियों के पौधों को बांटने की योजना भी बनायी जा रही है, ये प्रजातियां विलुप्त ना हो इसके लिए इनको बड़ी मात्रा में संरक्षण करने का काम भी वन अनुसंधान केंद्र कर रहा है।

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