WhatsApp Image 2021 01 11 at 12.00.44 PM बंगाल विधानसभा चुनाव: तेज हो रहे पार्टियों के हमले, "असली रैली-नकली रैली" को लेकर जुबानी जंग
फाइल फोटो

कोलकाता। बंगाल में चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं नेताओं के जुबानी तीर तेज हो रहे है। कोई भी पार्टी विपक्षी पार्टी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। राजनीति में यह कोई नया नहीं है लेकिन बंगाल की राजनीतिक लड़ाई अब असली रैली बनाम नकली रैली में बदल गई है। कहानी की शुरुआत हुई जब टीएमसी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, 18 तारीख को ममता बनर्जी जब नंदीग्राम में जाएंगी तो लोगों के चेहरे और मुस्कान होगी। पैसा देकर भाड़े के लोगों से रैली करना नही पड़ता है हमको।

पिछले कुछ दिनों से बीजेपी और टीएमसी के लगातार रैली और रोड शो हो रहे हैं। दोनों ही पार्टियां एक दूसरे को पीछे छाड़ना चाहती हैं। एक तरफ टीएमसी के सामने सत्ता बनाए रखना चुनौती हैं वहीं ममता के गढ़ में बीजेपी भगवा लहराना चाहती है। दो दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद बंगाल पहुंचे और एक चावल मुठ्ठी कार्यक्रम की शुरुआत की। वहीं अगले ही दिन ममता बनर्जी ने बंगाल में सभी को कोरोना का टीका फ्री देने का ऐलान करके दिल्ली तक हलचल मचा दी। विधानसभा चुनाव होने है उससे पहले चुनावी मौसम में ममता का यह बयान काफी अहमियत रखता है इसीलिए बीजेपी ने इस बयान को तुरन्त सियासी ठहरा दिया।

 

पिछले कुछ हफ्तों से बीजेपी और टीएमसी दोनों ही पार्टियां रैली और रोड शो में एक दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रही है। 20 दिसंबर को गृहमंत्री अमित शाह बोलपुर में रोड शो करने के 9 दिन बाद ममता बनर्जी भी वहीं बोलपुर में रोड शो किया था। नौ तारीख को बर्धमान में जेपी नड्डा रोड के रोड शो करने के एक दिन बाद बीते कल यानी कि रविवार को उसी जगह पर टीएमसी ने रोड शो किया था। रैलियां और रोड शो देखकर इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि दोनों पार्टियों ने कमर कस ली है। पिछले हफ्ते गंगारामपुर में अभिषेक बनर्जी की रैली में जबरदस्त भीड़ देखने लायक थी। ऐसे में काकली कह रही है कि टीएमसी की रैली है असली रैली और बीजेपी की नकली।

 

हालांकि बीजेपी टीएमसी के इस दावे का मजाक उड़ा रही है। बीजेपी का कहना है कि पैसा टीएमसी के पास नही हैं ? टीएमसी हार सामने देखकर बौखला गयी है। आने वाले कुछ हफ़्तों में बंगाल में और भी बड़ी रैली होने वाली है। भीड़ जुटाने में दोनों ही पार्टियां अब तक कामयाब रही हैं। अब देखना ये होगा कि ईवीएम मशीन पर किस पार्टी को इसका फायदा ज़्यादा मिलता है।

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