पाकिस्तान में कई माह बाद बालाकोट पहुंच सकी मीडिया, बच्चों को रटाया गया जवाब

पाकिस्तान में कई माह बाद बालाकोट पहुंच सकी मीडिया, बच्चों को रटाया गया जवाब

एजेंसी, नई दिल्ली। भारत द्वारा बालाकोट पर की गई एयर स्ट्राइक के 32 दिन बाद पाकिस्तानी सेना चुनिंदा पत्रकारों के एक ग्रुप को घटनास्थल पर लेकर गई। हालांकि, सच जानने गए पत्रकारों को यहां भी निराशा ही हाथ लगी, क्योंकि बालाकोट के कुछ इलाके अभी भी पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने घेर रखे हैं।

वहां पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने बालाकोट का हुलिया बदलकर दुनिया को ऐसा दिखाने को कोशिश की है, जिससे लगे कि ये कोई आम मदरसा है।एक न्यूज चैनल को दी गई खुफिया जानकारी के मुताबिक, बालाकोट स्थित मदरसे में 300 बच्चों को रखा गया है।बताया जा रहा है कि उन्हें सवालों के जवाब रटाए गए थे।

28 मार्च को आठ मीडियाकर्मियों की टीम के सदस्यों को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाने से पहले 300 के करीब बच्चों को कैंप में बैठा दिया गया था। सभी बच्चों को पहले ही ब्रीफिंग कर ये समझा दिया गया था कि उन्हें मीडिया के सामने क्या बोलना है।

पाकिस्तान की सेना पत्रकारों के एक समूह को लेकर हेलीकॉप्टर से बालाकोट ले गई। इन्हें हेलीकॉप्टर के जरिये ही एयर स्ट्राइक की जगह पर ले जाया गया। सुबह 10 बजे से 3.30 बजे तक घटनास्थल पर मौजूद रही मीडिया को बच्चों से बात करने की इजाजत के साथ ही वीडियो बनाने का भी मौका दिया गया।

मगर, घटनास्थल के कुछ हिस्सों को कवर करके रखा गया था और वहां पर किसी को जाने की इजाजत नहीं दी गई। खुफिया सूत्रों के मुताबिक उस जगह की हिफाजत फ्रंटियर कॉर्प के जवान कर रहे हैं। फ्रंटियर कॉर्प पाकिस्तान के अर्धसैनिक बल की एक टुकड़ी है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने बालाकोट में हमले के बाद ही पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कोर को तैनात कर दिया था। इसके बाद चुपचाप आतंकियों के शवों को हटा दिया गया और तबाह हुए कैंप को दोबारा दुरुस्त कर दिया गया। यही वजह है कि हमले के एक महीने बाद पाकिस्तानी मीडिया को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाया गया।