medical data मरीजों व डॉक्‍टरों की सूचनाएं अब नहीं हो सकेंगी लीक, तैयार किया सॉफ्टवेयर

लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर रईस अहमद खान के नेतृत्व में 11 सदस्यों की टीम के द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए दो अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के अनुदान प्राप्त हुए हैं। यह सॉफ्टवेयर “डिजिटल हेल्थ केयर सूचना प्रबंध प्रणाली और हेल्थ केयर बिग डाटा को सुरक्षित करने के लिए” तैयार किये गए हैं।

सुरक्षित अस्पताल प्रबंधन प्रणाली के लिए उसका ब्रीच प्रूफ होना आवश्यक है, ताकि अस्पताल में भर्ती मरीज़ और डॉक्टर्स दोनों की सूचनाओं को प्रभावी तरीके से गोपनीय रखा जा सके। इसको ध्यान में रखते हुए “अ सिक्योरिटी मैनेजमेंट सिस्टम फॉर डिजिटल हेल्थ केयर इनफार्मेशन मैनेजमेंट फाइल्ड एंड इट्स मेथड देयरऑफ़” शीर्षक आधारित एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।

bbau मरीजों व डॉक्‍टरों की सूचनाएं अब नहीं हो सकेंगी लीक, तैयार किया सॉफ्टवेयर

जिसमें भारत और विदेश के कुल 6 सदस्य ने कार्य किया है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर डॉ अलका, सहायक प्रोफेसर, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, बीबीएयू और डॉ0 राजीव कुमार, सहायक प्रोफेसर, कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग, एसआरएम विश्वविद्यालय, बाराबंकी शामिल हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ0 होसाम अल्हाकामी, डॉ अब्दुल्ला बाज और डॉ वाजदी अलखामी को इस अनुसंधान कार्य में सदस्य के रूप में सहयोग किया गया है। प्रोफेसर रईस अहमद खान के मार्गदर्शन में यह परियोजना पूरी हुई है।

दूसरा पेटेंट “बिगडाटा एनालिसिस फॉर स्मार्ट हॉस्पिटल सिस्टम यूसिंग ब्लॉकचैन ” सॉफ्टवेयर के लिए प्राप्त हुआ है। इसमें कुल 5 सदस्य हैं, जिसमें डॉ राजीव कुमार, सहायक प्रोफेसर, कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग, एसआरएम विश्वविद्यालय, बाराबंकी, राष्ट्रीय स्तर पर शामिल हैं। डॉ अब्दुल्ला बाज, डॉ मोहम्म-अल-शेयरफ और डॉ होसाम अल्हाकामी ने इस अनुसंधान कार्य में सदस्य के रूप में सहयोग किया है। प्रोफेसर रईस अहमद खान के नेतृत्व में यह कार्य पूरा हुआ है।

भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के प्रयासों के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर, सुरक्षित तथा कम लागत वाला बनाने के दृष्टिकोण से तैयार यह सॉफ्टवेयर, मेडिकल थिंग्स, ब्लॉकचेन की कार्यप्रणाली तथा डाटा जुटाने के लिए ‘बिग डाटा एनालिटिक्स’ पद्धति का उपयोग करके हेल्थ केयर डाटा और चिकित्सा पद्धतियों की सुरक्षा तथा गोपनीयता बनाए रखने में मददगार होगा। इसके अलावा ये दिए गए पेटेंट मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए भी मददगार साबित हो सकते हैं।

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