surya 1 महाभारत काल के बाद अब पड़ रहा है ऐसा सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 

21 जून को साल का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। जिसके प्रभावों को लेकर काफी चर्चा हो रही है। यही कारण है कि, ज्योतिषि लगातार इस सूर्यग्रण को लेकर चेतावनी के साथ महाभारत के समय घटित घटनाओं की बात कर रहे हैं।

surya 2 महाभारत काल के बाद अब पड़ रहा है ऐसा सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 
एक महीने में दो ग्रहणों के लगने का संयोग भले ही 50 साल के बाद बन रहा है। मगर ज्योतिषियों के मुताबिक ये दुर्लभ खगोलीय संयोग महाभारत की लड़ाई के दौरान भी मौजूद था।
18 दिनों की लड़ाई के दौरान पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण तो 13 दिन के बाद सूर्य ग्रहण लगा था। जो संपूर्ण जगत के लिए शुभ नहीं था। सूर्य ग्रहण के दौरान ही अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने में भी सफलता पाई थी, नहीं तो युद्ध का परिणाम कुछ दूसरा हो सकता था।

रविवार के दिन लगने वाले इस ग्रहण को चूड़ामणि ग्रहण भी कहा जाता है। इस ग्रहण के सूतक नियम आदि 20 जून की रात 10.09 बजे से मान्य होंगे। 21 जून आषाढ़ कृष्ण पक्ष को कंकणाकृति खंडग्रास को यह सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत के कुछ भूभाग में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा व कुछ भाग में कंकणाकृति रूप में दिखेगा।

मेष, सिंह, कन्या, मकर राशि पर शुभ। वृषभ, तुला, धनु, कुंभ राशि पर मध्यम और मिथुन, कर्क, वृश्चिक, मीन राशि पर उसके अशुभ प्रभाव रहेंगे. इस ग्रहण के अवधि काल में एक साथ छह ग्रह वक्री रहेंगे. इसमें बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु हैं। ये ग्रह 21 जून को वक्री रहेंगे।

सूर्यग्रहण ने ऐसे बचाई अर्जुन की जान
गांडीव धनुष रखकर आत्मदाह के लिए आगे बढ़े। सामने जयद्रथ भी आत्मदाह के लिए अर्जुन को उनकी प्रतीज्ञा याद दिलाने लगा। तभी अचानक भगवान श्रीकृष्ण ने सूर्य से बादलों को हटा दिया। यह देखकर जयद्रथ और पूरी कौरव सेना घबरा गई। इससे पहले कि जयद्रथ भागता भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अपना गांडीव उठाओ और अपनी प्रतिज्ञा पूरी करो। इस तरह सूर्यग्रहण ने अर्जुन की जान बचाई और जयद्रथ की मृत्यु की वजह बना।

सूर्य ग्रहण का समय
9:15 पूर्वाह्न आंशिक ग्रहण शुरू
10:17 पूर्वाह्न पूर्ण ग्रहण शुरू
12:10 अपराह्न अधिकतम ग्रहण
2:02 बजे पूर्ण ग्रहण समाप्त
3:04 बजे आंशिक ग्रहण समाप्त

जून के माह में सूर्य और चंद्रग्रहण दोनों ही लगने वाले हैं. चंद्रग्रहण जहां आज यानी 5 जून को लगेगा तो वहीं 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। ग्रहण के दौरान सूतक का भी विशेष महत्व होता है। सूतक काल चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण दोनों के समय लगता है। सूतक काल में किसी भी तरह का कोई शुभ काम नहीं किया जाता. यहां तक की कई मंदिरों के कपाट भी सूतक के दौरान बंद कर दिये जाते हैं।

सूर्य ग्रहण के समय ग्रहण के समय शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्री स्थिति में रहेंगे। राहु और केतु तो सदैव उल्टी चाल ही चलते हैं तो इस लिहाज से कुल छह ग्रह वक्री रहेंगे। यह स्थिति पूरे विश्व में उथल पुथल मचाएगी।
ज्‍योतिष के अनुसार माना जा रहा है कि कोरोना महामारी 2019 के आखिरी सूर्य ग्रहण से शुरू हुई थी और इस साल के पहले सूर्य ग्रहण पर जाकर समाप्‍त होगी।
बताया जा रहा है कि हर 18 साल बाद इस तरह का सूर्य ग्रहण होता है। इस बार भी देश के कुछ स्‍थानों पर यह खंडग्रास के रूप में नजर आएगा। कम ही स्‍थानों पर पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। माना जा रहा है कि भारत में देहरादून, सिरसा और टिहरी के अलावा कुछ ही शहरों में यह वलयाकार रूप में दिखेगा। वहीं दिल्‍ली, चंड़ीगढ़, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, बंगलुरु आदि शहरों में यह आंशिक रूप में दिखेगा।

सूर्यग्रहण का फल और प्रभावज्‍योतिष के विशेषज्ञों की मानें तो इस सूर्य ग्रहण से ग्रह नक्षत्रों में होने वाले बदलावों से कोरोना महामारी की अंत होना शुरू हो जाएगा।
यह भी माना जा रहा है कि प्रमुख देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के बीच भी तनाव और बहस बढ़ सकती है। वहीं व्‍यापारियों के लिए यह ग्रहण अच्‍छा और लाभ देने वाला माना जा रहा है।

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सूर्य ग्रहण में भूलकर भी न करें ये काम
यदि आप सूर्य ग्रहण का गवाह बनना चाहते हैं, तो इसे नग्न आंखों से देखने का प्रयास न करें। कई बार लोग इस सलाह को मजाक में उड़ा देते हैं, लेकिन यह आपकी आंखों के लिए बेहद ज़रूरी है। नग्न आंखों से ग्रहण देखने पर आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। दूरबीन, टेलीस्कोप, ऑप्टिकल कैमरा व्यूफाइंडर से सूर्य ग्रहण को देखना सुरक्षित है।इस तरह आप सूर्यग्रहण के प्रभावों से बच सकते हैं।

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