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बदले बदले सुर में बोले पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला,

‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने वाले एनसी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को बीजेपी ने बताया शेर

केंद्र और फारूक में गुप्त समझौता तो नहीं ?

भारत खबर
जम्मू कश्मीर। नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री डा फारूक अब्दुल्ला ने सुर बदले से नजर आए। धारा 370 टूटने के बाद पहली बार फारूक अब्दुल्ला ने अपने निवास पर कार्यकर्ताओं से बैठक की और मीडिया से रूबरू हुए। पूर्व मुख्यमंत्री धारा 370 और 35 ए पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।फारूक अब्दुल्ला के बदले सुर से राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए ही केंद्र और उनके बीच कोई समझौता हुआ है। केंद्र सरकार भी चाह रही है कि जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोबारा शुरू हो।

भाजपा के वरिष्ठ नेजा नेता मनोज सिन्हा को भी इसी कड़ी में जम्मू कश्मीर में भेजा गया है। विधानसभा चुनावों के लिए केंद्र सरकार पर पूरी तरह से दवाब है। इसी साल 31 अक्तूबर को जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का एक साल पूरा हो जाएगा। कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसी जा रही है। हालात बेहतर होने के साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों के दस हजार जवानों को वापस बुला लिया गया है।

दो संभागों में फारूक का सम्मान
जम्मू। जम्मू और कश्मीर में डा फारूक अब्दुल्ला दोनों संभागों में पसंदीदा नेता हैं। उनके अलावा मौजूदा हालात में और कोई नेता नहीं है जो राज्य की बागडोर संभाल सके। फारूक अब्दुल्ला का आम जनता के बीच भी बेहतर प्रभाव है और मान्य हैं। फारूक अब्दुल्ला को दो बार पीएसए भी लगाया गया और मौजूदा समय में वह सांसद भी हैं। उमर अब्दुल्ला भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके हैं, जब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता है। महबुबा मुफती अभी तक जेल में बंद है और राष्ट्रविरोधी ब्यानों के कारण जम्मू संभाग में उन्हें कोई पसंद नहीं करता है। अन्य किसी भी नेता का इतना कद नहीं है कि वह राज्य की बागडोर संभाल सके।

दबाव में नहीं कर पाए थे बैठकें
जम्मू। डा फारूक अब्दुल्ला ने गुपकार रोड़ स्थित अपने निवास स्थान पर चार अगस्त 2020 को सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई। पांच अगस्त को 370 टूटने की साल गिरह थी। प्रशासन ने उनके घर के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए और बैठक नहीं हो पाई। इससे पहले भी फारूक अब्दुल्ला ने घर में बैठक का आयोजन किया। प्रशासन ने धारा 144 लगा दी। हालांकि डॉ फारूक भलि भांति जानते थे कि पांच अगस्त से पहले प्रशासन सख्ती कर देगा और बैठक नहीं होने देंगे।

राम माधव भी दे चुके हैं संकेत
जम्मू। भाजपा के जम्मू कश्मीर प्रभारी भी संकेत दे चुके हैं कि धारा 370 को छोड़कर वह पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की पार्टियों का समर्थन करेंगे। धारा 370 टूटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। इस संकेत और पत्रकार वार्ता में डा फारूक का धारा 370 का उल्लेख नहीं करने से साफ है कि केंद्र सरकार फारूक अब्दुल्ला को लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए आगे कर सकती है। ताकि चुनानों का बायकाट नहीं हो और निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव कराए जा सकें।

राज्य के हालात पर जताई चिंता
जम्मू। डा फारूक अब्दुल्ला ने प़़त्रकार वार्ता में कहा कि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य नहीं है। पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप है। आम जनता आजाद नहीं है और बंद रखा जा रहा है। उनके कार्यकर्ताओं को भी अभी तक नहीं छोड़ा है। वह अपने कार्यकर्ताओं से मिले और कोर्ट के आदेश के बाद 20 नेताओं को रिहा किया गया है। कुछ और नेता भी नजर बंद हैं। उनसे भी मुलाकात की जाएगी और बैठक करके अगली रणनीति को तैयार किया जाएगा। नेकां भी राज्य में लोकतंत्र की बहाली चाहती है। बैठक में ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शांति बहाली की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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