आखिर क्यों चढ़ाते हैं शनिदेव को तेल, जानिए क्या है धार्मिक कारण

लखनऊ: आपने शनिवार के दिन भगवान शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ाते हुए कई बार देखा है। शनि मंदिर में खुद भी भक्त तेल का अभिषेक करने जाते हैं। यह एक परंपरा है, जो वर्षों से चली आ रही है।

पौराणिक कथा में छिपा राज

इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जो तेल चढ़ाने की प्रथा को सही ठहराती है। दरअसल जब रावण माता सीता को अपहरण करके लंका ले गया था, उसके बाद हनुमान जी सीता माता की तलाश में भी लंका पहुंच गए। शनिदेव रावण के यहां बंदी थे। सीता जी की तलाश के दौरान उन्हें शनिदेव की बंदी अवस्था में दिखाई दिए।

बंधन से मुक्त करने के लिए उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना की। हनुमान जी ने मुझे बंधन मुक्त किया और दूर फेंक दिया। जिससे वह लंका से बाहर सुरक्षित अन्य स्थान पर पहुंच जाएं। हनुमान जी के फेंकने के बाद जब शनि महाराज दूसरी जगह गिरे तो उन्हें काफी चोट आ गई। इसके बाद उनकी पीड़ा को दूर करने के लिए हनुमान जी ने उन पर तेल का अर्पण किया। यह प्रथा आज भी चली आ रही है। शनि महाराज पर सरसों का तेल अर्पण करके आज भी उनकी पूजा की जाती है।

सरसों के तेल का अभिषेक

हर शनिवार शनि देव पर सरसों के तेल का अभिषेक किया जाता है। लंबे समय से शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए यही तरीका अपनाया जाता है। उनकी पूजा के दौरान काले तिल और काले कपड़े का भी इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं शास्त्र यह भी कहता है कि शनिदेव की पूजा करने से हनुमान जी भी प्रसन्न होते हैं।

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