कैप्टन ने राणा का इस्तीफा किया स्वीकार, राहुल के साथ हुई बैठक में फैसला

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफा देने वाले पंजाब के बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह का इस्तीफा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वीकार कर लिया है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मीटिंग करने के बाद कैप्टन ने ये फैसला लिया है। हालांकि कैप्टन, राणा का इस्तीफा मंजूर करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन राहुल गांधी के कहने पर उन्हें ऐसा करना पड़ा। बताया जा रहा है कि चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं राणा के इस्तीफे को मंजूरी दिए जाने के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा लगातार राणा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे।

गौरतलब है कि नीलामी में अपने रसोइए के नाम पर रेत खड्डों लेने और 1000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के मुख्य आरोपी गुरिंदर सिंह से पांच करोड़ रुपये राजबीर एंटरप्राइसिस के लिए लेने के आरोपों में फंसे राणा गुरजीत ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे को लेकर सचिवालय में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी खूब चर्चा रही। कुछ लोग इसे देरी से उठाया हुआ सही कदम बता रहे थे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उनके इस्तीफे के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी की ईकाई में नई जान आ गई है। दरअसल इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के नेता सुखपाल खैहरा ने ही हवा दी थी।

खैहर ने सूचना अधिकार का उपयोग करके  राणा की कंपनियों से संबंधित कई दस्तावेज पेश किए थे।  यहां तक कि नारंग कमीशन की रिपोर्ट भी उन्होंने सूचना अधिकार का उपयोग करके ही ली। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सिंचाई विभाग के ठेकेदार गुरिंदर सिंह से पांच करोड़ रुपये राणा की कंपनी द्वारा लेने का लिंक सामने आया। गुरिंदर सिंह एक हजार करोड़ से ज्यादा के घोटाले के मामले में विजिलेंस की कैद में हैं। सुखपाल खैहरा ने नारंग कमीशन को भी कठघरे में खड़ा किया और कई ऐसे सवाल दागे, जिनके बारे में नारंग कमिशन की रिपोर्ट खामोश थी।