08 12 गुजरात हाई कोर्ट का फैसला,नरोदा पाटिया दंगा मामले में कोडनानी बरी

अहमदाबाद। 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पाटिया में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा भड़काने की आरोपी पाई गई माया कोडनानी को निर्दोष करार दे दिया गया है। इस मामले को लेकर गुजरात हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माया को बरी कर दिया है, लेकिन बाबू बजरंगी अभी जेल में ही रहेगा। बता दें कि कोडनानी को एसआईटी मामलों की विशेष अदालत ने दंगा भड़काने के आरोप में 28 साल की सजा सुनाई  थी और बाबू बजरंगी समेत 32 लोगों को मृत्यु तक आजीवान कारावास की सजा सुनाई गई थी।

इसके अलावा सात लोगों को 21 साल की सजा और शेष अन्य को 14-14 साल की सजा सुनाई गई थी। वहीं 20 अन्य आरोपियों को निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जिसके अभाव में एक विशेष जांच दल ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की थी। दरअसल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान इन सब पर नोरदा पाटिया नाम की मुस्लिम कॉलोनी में दंगा भड़काने और वहां रह रहे 97 लोगों की हत्या करवाने का आरोप लगा था। 08 12 गुजरात हाई कोर्ट का फैसला,नरोदा पाटिया दंगा मामले में कोडनानी बरी

नरोदा पाटिया में दंगाईयो ने 97 लोगों को जिंदा जला दिया था। इसी मामले में विशेष अदालत ने कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत अन्य लोगों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी,लेकिन हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोडनानी पर लगे आरोपों को गलत पाया गया,जिसके एवज में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। आपको बता दें कि गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए थे।

इस मामले के प्रारंभिक गवाह 60 वर्षीय दिलवर सैयद ने कहा था कि उस खौफनाक मंजर के बारे में सोचते हुए मैंने 10 साल गुजार दिए। पाटिया में मैंने जो कुछ देखा उसे कभी भुला नहीं सकता। इस फैसले से मुझे पूरा तो नहीं, थोड़ा सुकून जरूर मिला है। उसने रुंधे हुए गले से कहा था कि कम से कम 100 परिवार बर्बाद हो गए। इस मामले में 64 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। बाकी बचे 61 लोगों पर हत्या, आगजनी और दंगा भड़काने के आरोप थे। इनमें से अधिकांश को जमानत मिल गई थी।

 

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