नेपाल : संविधान संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन

काठमांडू| नेपाल में एक संविधान संशोधन प्रस्ताव के विरोध में हजारों लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। खासकर प्रांतीय सीमाओं को लेकर जारी विवाद के समाधान के लिए प्रांत संख्या पांच को बांटने के प्रस्ताव को लेकर यह विरोध हो रहा है। मधेस स्थित राजनीतिक दलों की मांगें पूरी करने और शिकायतों के निवारण के लिए नेपाल सरकार के संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के एक ही दिन बाद बुधवार को लुंबिनी संभाग के छह जिलों के हजारों लोगों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया।

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मुख्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल(एकीकृत मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीएन-यूएमएल इस प्रस्ताव को पेश होने से पहले ही इसे खारिज कर चुकी है। जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-माओवादी सेंटर के बीच इस प्रस्ताव को लेकर गहरा मतभेद और नाराजगी है। संशोधन प्रस्ताव में मौजूदा पांच नंबर के प्रांत के कुछ जिलों को प्रांत नंबर चार और छह में शामिल किए जाने हैं। इस प्रस्तावित बदलाव के खिलाफ और प्रांत संख्या पांच को एकीकृत बनाए रखने के लिए पार्टी के रुख से अलग रहते हुए हजारों लोगों ने बुधवार की सुबह से ही एकजुट होकर प्रदर्शन किया।

मधेस आधारित दलों को खुश करने के लिए सरकार ने नेपाल के दक्षिणी मैदानी भाग में दो प्रांत गठित करने का निर्णय लिया है। नए प्रस्ताव के अनुसार दक्षिणी मैदानी भाग में दो प्रांत होंगे प्रांत दो और छह। ये दोनों प्रांत पूरी तरह से मधेसी बहुल होंगे। इस प्रस्ताव के तहत लुंबिनी जोन के छह जिलों में सुबह से ही तनाव है, क्योंकि सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए हैं। अपने आप निकली इस रैली को सीपीएन-यूएमएल और यहां तक कि सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस और मोओवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी समर्थन है। पार्टी के फैसले और निर्देशों की अवहेलना करते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और प्रांत पांच के बंटवारे के खिलाफ गठबंधन बना लिया।

इस प्रदर्शन के कारण लुंबिनी क्षेत्र के छह जिलों के वाहनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ, बाजार बंद रहे, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। आंदोलनकारी मधेसी मोर्चा के एक प्रमुख गठबंधन ने बुधवार को सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष और एक प्रमुख मधेसी नेता उपेंद्र यादव इस प्रस्तावित विधेयक को यह कहकर खारिज कर दिया है कि उन लोगों से पहले सलाह-मशविरा किए बगैर प्रस्ताव पंजीकृत करके सरकार ने एक गंभीर चूक की है। अब यदि यादव के नेतृत्व वाली पार्टी इस संविधान संशोधन प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी तो इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल कर पाने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।