हाईकोर्ट ने मेयर और पार्षदों के मामले में तीन महीने में फैसले का आदेश दिया

उत्तराखण्ड। उत्तराखण्ड में मेयरों के खिलाफ कई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पर हाई कोर्ट ने जांच का फैसला सुनाया था। रूद्रपुर नगर निगम मेयर और 16 पार्षदों पर अब कार्रवाई होने से उन पर खतरें की घंटी बज रही है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आने वाले तीन महीनों के अंदर राज्य सरकार को फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।

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मेयरों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के सही होने की पुष्टि होने के बाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। रूद्रपुर के रहने वाले रामबाबू ने अपनी इस याचिका में कहा था कि मेयर सोनी कोली और कई पार्षदों ने नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया है। जस्टिस राजीव शर्मा और आलोक सिंह की खंडपीठ ने 10 नवंबर को हुई सुनवाई में कहा कि राज्य सरकार तीन महीने में अपना फैसला सुनाए।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तराखण्ड के शहरी विकास विभाग पर दबाव बढ़ गया है। नगर निकाय एक्ट के अनुसार सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के इस मामले की पुष्टि हो जाने के बाद पार्षदों और मेयरों की सदस्यता भी रद्द हो सकती है।