देवभूमि के सीमांत क्षेत्र को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज के तौर विकसित करेगा

पिथौरागढ़। देवभूमि उत्तराखंड के भारत, नेपाल और चीन की सीमा से सटे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों को अब वर्ल्ड हेरिटेजके तौर पर शामिल करने की बाद चल रही है। प्राकृतिक धरोहरों और जैव विविधता से भरपूर इन इलाकों को यूनेस्को विश्व धरोहर के तौर पर घोषित करने जा रहा है। हिमालय की इन प्राकृतिक धरोहरों को विश्व धरोहर घोषित कर यूनेस्को हिमालयी संस्कृति को संरक्षित करने की मुहिम चला रहा है।

utrakhand

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के संरक्षित करने के कार्यक्रम के तहत पिछले 4 सालों से इन हिमालयी इलाकों में कैलाश लैंड स्कैप योजना संचालित कर रहे हैं। फिलहाल इस योजना पर नेपाल,भारत और चीन की सरकारें संयुक्त तौर पर कार्यकर रहीं हैं। 4 सालों से इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत,नेपाल और चीन से सटे उच्च हिमालयी इलाकों का गहन अध्ययन किया जा रहा है।

फिलहाल इस माध्यम से भारतीय क्षेत्र के कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग को विश्व धरोहर के तौर पर लाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे इन इलाकों में पर्यावरण के साथ संस्कृति का संरक्षण किया जा सकेगा। इसके साथ ही प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने से इस इलाके की रिहाया को रोजगार और आजीविका के अवसरों में इजाफा होगा साथ ही अरसे से उपेक्षित इस हिमालयी क्षेत्र के बदलाव में भी ये प्रोजेक्ट अहम किरदार निभाए गा। यह प्रोजेक्ट यहां के स्थानीय लोगों की जीवनशैली और संस्कृति को संरक्षित कर इसे वर्ल्ड हैरिटेज के तौर पर प्रदर्शित करेगा।