सरकारी संवेदनहीनता का प्रमाण, मुह मांगे पैसे न मिलने पर डिलिवरी बीच में रोकी

यूपी। बांदा में शुक्रवार की शाम को  जिले के महिला अस्पताल में दलित राजकरण रैदास की गर्भवती पत्नी फूलकुमारी की अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मौत हो गई। पीड़ित ने शुक्रवार को अपनी पत्नी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था जहां उससे इलाज करने के लिए 5000 रुपए की मांग की गई। समय पर पैसे न मिल पाने के कारण डिलीवरीा को बीच में ही रोक दिया गया जिसके बाद मां और बच्चे की शनिवार की सुबह 10 बजे मौत हो गई।

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यही नहीं जच्चा-बच्चा की मौत के बाद पीड़ित को एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई जिसके बाद मजबूरन पीड़ित राजकरण खुद ही अपनी मृत पत्नी और नवजात के शव को स्ट्रेचर पर घसीटते हुए डीएम आफिस पर पहुँच गया और अपने साथ हुई इस निर्ममता को एसडीम को सुनाया। जिसके बाद एसडीएम ने तुरंत एम्बुलेंस के द्वारा शवों को उनके गांव भिजवाया और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। एसडीएम क्रान्ति सिंह ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच कर दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।