नोट बंदी से गल्ला मंडियों में मचा हाहाकार

हमीरपुर । नोटबंदी से हमीरपुर जिले की गल्ला मंडी के कारोबार को चार करोड़ रुपये का घाटा लगा है। यहां का पूरा व्यापार ठप्प हो जाने से पिछले दस दिनों में नवीन गल्ला मंडी परिषद को आठ लाख रुपये के राजस्व का झटका लगा है। जानकारी मिली है कि भरुआ सुमेरपुर की नवीन गल्ला मंडी में पुराने नोटबंदी से सन्नाटा पसरा है। व्यापारी और पल्लेदार कंगाल हो गए हैं। अगर यही हाल बना रहा तो यहां से विदेशों तक जाने वाली सफेदा ज्वार का कारोबार ठप्प हो जाएगा।

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गल्ला व्यापारी रामरूप सिंह, श्याम बिहारी पांडेय, वरदानी गुप्ता, महेश गुप्ता व नंदकिशोर का कहना है कि ज्वार कारोबार टूट गया है, क्योंकि किसानों को देने के लिए करेंसी का पर्याप्त इंतजाम अभी तक नहीं हो सका। नोटबंदी से किसानों के साथ अब व्यापारी भी पिस रहा है। पिछले दस दिनों से ठप्प गल्ला मंडी में पूरे दिन सन्नाटा ही पसरा है। आढ़तियों की दुकानों के शटर पूरे दिन गिरे रहते हैं। पल्लेदार और बिचैलिये सुबह तैयार होकर मंडी तो आते हैं, लेकिन कारोबार न होने से मायूस होकर घर लौट जाते हैं। कारोबार बंद होने का सबसे बड़ा असर पल्लेदारों की रोजीरोटी पर पड़ा है। अब यह लोग दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

नवीन गल्ला मंडी सचिव देव कुमार पोरवाल का कहना है कि नोटबंदी के फैसले के बाद गल्ला मंडी के कारोबार में पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पिछले दस दिनों में ही मंडी परिषद को आठ लाख रुपये के राजस्व का झटका लगा है। इस मंडी में रोजाना 40 लाख रुपये का कारोबार होता था। उनका कहना है कि अभी तक चार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। यहां पर ज्वार का कारोबार बड़े पैमाने पर होता था जो अब ठप्प है।

इस क्षेत्र की सफेदा ज्वार की मांग विदेशों तक होती है। पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब व अफगानिस्तान तक यहां की ज्वार भेजी जाती है। सफेदा ज्वार के कारोबार से मंडी परिषद को अच्छा खासा राजस्व भी मिलता था, लेकिन नोटबंदी का हथौड़ा पड़ने से कारोबार ठप्प हो गया। इस मंडी में कानपुर, फतेहपुर, जालौन, महोबा, छतरपुर, टीकमगढ़, झांसी, बांदा, चित्रकूट आदि जिलों से सफेदा ज्वार आती रही है।बड़े पैमाने पर ज्वार का थोक कारोबार करने वाले गल्ला व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष ज्वार का कारोबार नोटबंदी से पस्त हो गया है। व्यापारी कहते हैं कि मोदी के फैसले ने कारोबार की कमर तोड़ दी है।