अखिलेश ही होंगे मुख्यमंत्री का चेहरा बोले शिवपाल

लखनऊ। मंत्री गायत्री प्रजापति समाजवादी पार्टी की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पार्टी में एकजुटता एवं शक्ति प्रदर्शन के लिए आयोजित किये जारहे “रजत जयंती समारोह” के आयोजक बने। मन्त्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने बताया कि आज प्रदेश कार्यालय पर आयोजित बैठक में प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने बार-बार कहा कि अखिलेश यादव ही सपा का मुख्यमंत्री चेहरा होंगे।

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अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए गायत्री प्रजापति ने बताया कि आज अपने घर पर समारोह की तैयारी के लिए उन्होंने पार्टी के पिछड़े एवं अति-पिछड़े वर्ग के पदाधिकारियों की मीटिंग बुलाई है, जिसमे बड़ी संख्या में युवा पदाधिकारियों ने भी भाग लिया।

मीडिया में चलरही अखिलेश के समारोह में न शामिल होने की ख़बरों पर गायत्री ने यह भी कहा कि मैं खुद मुख्यमंत्री से मिला जिसके आधार पर मैं कह रहा हूँ, कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित सभी पार्टीजन समारोह में शिरकत करेंगे।

समारोह की तैयारियों के सम्बन्ध में संयोजक बने गायत्री प्रसाद ने कहा कि यह समारोह एक ऐतिहासिक कार्यक्रम होगा और प्रदेश में दूसरी बार लगातार समाजवादी सरकार और विकास पुरुष अखिलेश यादव को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में इस समारोह से पार्टी आगे बढ़ेगी।

दूसरी ओर आज सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव जिला महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों की बैठक कर पार्टी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके को पार्टी में अपनी शक्ति प्रदर्शित करने मौका बनाने की तैयारी एवं अन्य मुद्दों पर बात कर पार्टी कार्यालय से बाहर निकल गए, हालांकि शिवपाल ने मीडिया से कोई बात नहीं की, परंतु उसी समय के दौरान आगरा और इलाहाबाद तथा कुछ अन्य जनपदों के जिलाध्यक्ष बाहर आये और उन्होंने बताया कि शिवपाल यादव का कहना है कि अखिलेश यादव ही पार्टी की ओर से 2017 में मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे, और यदि अखिलेश कहेंगे तो मैं आज ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी उन्हें सौंपने को तैयार हूँ।

शिवपाल यादव के इस रुख से एक ओर समाजवादी पार्टी की अंदरूनी आपसी तकरार जहां कुछ थमती तो नज़र आरही है, वहीं दूसरी ओर “अखिलेश कहेंगे तो प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छोडूंगा” जैसी बात जिला-महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों की बैठक में कहकर उन्होंने खुद को पार्टी हित में त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले की छवि में पेश किया है।

इसी के साथ गेंद को भी अखिलेश के पाले में डाल दिया है, जाहिर है, समाजवादी पार्टी में काफी कुछ अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं है। है

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी अपने ‘घरेलू संग्राम से उबरने की कोशिश तो कर रही है। परंतु एक दूसरे से ज्यादा त्यागी और पार्टी का हितैषी होने का दावा भी हर कोई बढ़-चढ़ के कर रहा है।

Akeel New(अकील सिद्दीकी, संवाददाता)