मूलभूत मुद्दे उठाएं किसान: घनश्याम तिवाड़ी

सीकर, जयपुर। प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा है कि किसान मूलभूत मुद्दे उठाएं। उनको अपनी लागत कम करने के लिए बिजली, मजदूरी जैसी जरुरी चीजों पर ध्यान देने की जरुरत है। वे बुधवार को सीकर में स्वर्गीय कुम्भाराम आर्य की 21वीं पुण्यतिथि पर आयोजित किसान ललकार दिवस पर मुख्य वक्ता के रुप में बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कुम्भाराम आर्य ने जागीरदारी प्रथा के उन्मूलन के लिए काम किया था।तिवाड़ी ने साथ ही कहा कि स्वर्गीय भैरूसिंह शेखावत व स्वर्गीय कुम्भाराम आर्य ने जागरीदारी उन्मूलन और गरीबों की रक्षा करने के लिए काम किया, क्योंकि वे जड़ों से जुड़े हुए नेता थे। और अब कॉरपोरेट जागीरदारी प्रथा से आम किसानों को बचाने की जरुरत है। तिवाड़ी ने किसानों की समस्याओं पर बोलते हुए कहा कि किसानों को राजस्थान में फ्री बिजली मिलनी चाहिए, और सोलर एनर्जी का काम बड़े उद्योगपतियों के बजाए किसानों के साथ सहयोग करके किया जाना चाहिए।मनेरगा को किसानों की उत्पादकता से जोड़ा जाए, ताकि काम भी होगा और किसान के दो इनपुट एक तो बिजली और दूसरा मजदूरी फ्री हो जाएंगी, तो उत्पादकता भी बढ़ेगी और लागत मूल्य भी कम हो जाएगा। इससे किसानों को लाभकारी मूल्य मिल जाएगा और महगांई भी नहीं बढ़ेगी।

कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के तौर पर तिवाड़ी के अलावा पूर्व विधायक रणमल सिंह, स्वराज इंडिया से रुपाराम जानू, किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह, किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ वीरेंद्र सिंह और स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वरजी मौजूद थे।
मंत्रीमंडल विस्तार नहीं हो सकता: तिवाड़ी

तिवाड़ी ने कहा कि राज्य मंत्रीमण्ड़ल का विस्तार की चर्चा निरर्थक है, क्योंकि संविधान संशोधन तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णय के अनुसार संसदीय सचिव मंत्री माने जाते हैं। सरकार में मुख्यमंत्री, मंत्री व संसदीय सचिव मिलाकर 31 सदस्य पहले से ही शामिल हैं। इसलिए वर्तमान में मंत्रीमण्ड़ल विस्तार संभव नहीं है। तिवाड़ी सीकर में किसान ललकार दिवस कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।उन्होंने कहा यह बात और है कि मंत्रीमण्ड़ल का पुनर्गठन हो सकता है, कुछ को निकाल दिया जाए व कुछ को ले लिया जाए। लेकिन वह भी बेकार होगा,क्योंकि जब तक नेतृत्व परिवर्तन या नेतृत्व की शैली नहीं बदलेगी, तब तक यह कोई काम नहीं आएगा।

उन्होंने विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में मंत्रीमण्ड़ल विस्तार यदि होता है तो, यह संविधान का उल्लंघन होगा। तिवाड़ी ने दिल्ली सरकार के 21 विधायकों, तेलंगाना हाईकोर्ट के स्टे, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बैंच के फैसले सहित कई राज्यों के हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संसदीय सचिव यदि कोई सरकार बनाती है तो वह स्वत: ही मंत्री होता है, क्योंकि उसको मंत्री को मिलने वाली सभी सुविधाएं मिलती है।