नोट बंदी से श्रमिकों का हुआ सीजन में पलायन

लुधियाना। मोदी सरकार की नोट बंदी का असर अब व्यवसायी वर्ग और इनसे जुड़े श्रमिकों पर पड़ने लगा है। इन दिनों सर्दियों के सीजन में सूबे के प्रमुख व्यवसायिक शहरों में श्रमिकों की आमद बढ़ जाती थी । लेकिन इस बार ऐसा होने के बजाय उलटा हो रहा है। श्रमिक अब पलायन कर रहे हैं। वजह इनको रोजाना मिलने वाली मजदूरी भी नोट बंदी के हालत का शिकार हो गई है।

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1000 और 500 के नोटों की बंदी से मजदूरों के कामों पर खासा असर पड़ा है। क्योंकि रूपये की बंदी से जहां लोगों को रूपये पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इनको मिलने वाली मजदूरी पर भी संकट के बादल छाने लगे हैं। क्योंकि इस मामले में जहां दिक्कतों के साथ पैसे मिल रहे हैं, वही पैसे भी सीमित ही दिये जा रहे हैं ऐसे में जहां व्यापार का सारा काम मजदूर वर्गों को मिलने वाली नगद राशि से चलता था ऐसे में वो ठप्प पड़ गया है।

आकड़ों की माने तो व्यावसायिक नगरी में होजरी का काम तकरीबन 6 से 8 लाख कामगरों द्वारा किया जाता है। लेकिन नोट बंदी की मार ने सब बंद करा दिया है। व्यापारियों की माने तो स्वैटर, लेडीज कोटी, गर्म सूट, जैकेट, कोर्ट, स्वेट शर्ट, ट्राउजर, ट्रैक सूट आदि के आर्डर तो हैं लेकिन श्रमिकों को मजदूरी कैसे दी जाये ये बड़ा सवाल है। क्योंकि पुराने नोट चल नहीं रहे और नये मिल नही रहे। ऐसी हालत में होजरी के काम पर बुरा असर पड़ा है। फिलहाल अब मजदूरों ने रोजगार के अवसर ठप्प पड़ने पर परदेस से स्वदेश वापसी करनी शुरू कर दी है।