जलियांवाला बाग के शहीद अब नहीं रहेंगे गुमनाम

अमृतसर। 13 अप्रैल, 1919 का दिन भारतीय इतिहास का सबसे रक्तरंजित दिन था इसी दिन सदी का सबसे बड़ा निर्मम हत्याकांड जलियांवाला बाग हत्याकांड को अंग्रेजी हुकूमत में अंजाम दिया था। जलियांवाला बाग में देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले सैकड़ों गुमनाम शहीदों उनकी शहादत के 98 साल बाद आखिर नाम मिल गया।

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अब इन शहीदों के नाम को पंजाब सरकार ने गुमनामी की चादर से बाहर लाने का नेक काम किया है। इन शहीदों के नाम जलियांवाला बाग में लगे शिलापट्ट पर खुदवाये गये हैं। पंजाब सरकार के सौंदर्यीकरण योजना के तहत बाग के बाहर शहीदों की प्रतिमाओं का निमार्ण पर उस पर सैकड़ों शहीदों के नाम को उकेरा गया है। इन प्रतिमाओं के पास 24 घंटे मशाल जलाने की व्यवस्था भी बनाई गई है।

जलियांवाला बाग के गुमनाम शहीदों को लेकर आये दिन चर्चाएं होती थी, मांग की जाती रही है लेकिन इस बार पंजाब सरकार ने केन्द्रीय गृहमंत्रालय तक को लोगों और जनता के इस आग्रह से अवगत कराते हुए इस वावत पत्र लिखा था जिसके बाद केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार की पहल पर इसे अमलीजाम पहना दिया है।