टोक्यो से पहले कई लक्ष्य हासिल करने बाकी: साक्षी

नई दिल्ली। रियो ओलम्पिक में महिला कुश्ती स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली भारतीय पहलवान साक्षी मलिक का कहना है कि टोक्यो ओलम्पिक-2020 अभी बहुत दूर है और उन्हें अभी कई अन्य लक्ष्य हासिल करने हैं। साक्षी ने कहा कि 2020 ओलम्पिक खेलों से पहले कई प्रतियोगिताएं हैं, जिनमें उन्हें हिस्सा लेना है और अपने खेल में सुधार लाना है।

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रियो के बाद अगले लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर साक्षी ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, “अभी टोक्यो ओलम्पिक काफी दूर है। इस बीच कई प्रतियोगिताएं हैं, जिनमें हिस्सा लेना। मेरे कई छोटे-छोटे सपने बाकी हैं, जिन्हें पूरा करना है।”

साक्षी ने कहा कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी अनुभव हासिल करना है, ताकि वह टोक्यो ओलम्पिक में और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें। रियो ओलम्पिक में सबसे कठिन स्पर्धा और प्रतिस्पर्धी के बारे में साक्षी ने कहा कि सबसे मुश्किल मुकाबला कांस्य पदक वाला था। उन्होंने कहा कि किर्गिस्तान की इजुल दायनीव्यकवा ने उन्हें काफी कड़ी स्पर्धा दी।

ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल-2014 में रजत पदक जीतने वाली साक्षी ने टोक्यो ओलम्पिक के लिए तैयारियों की योजना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जिन कमियों के कारण वह रियो ओलम्पिक में स्वर्ण पदक तक पहुंचने में नाकाम रही थीं, उन कमियों को पार करने पूरी कोशिश करेंगी। साक्षी ने कहा कि रियो ओलम्पिक में हिस्सा लेने से उन्हें काफी अनुभव मिला है और इससे मिली सीख से वह टोक्यो ओलम्पिक में और भी बेहतर करने की कोशिश करेंगी।

रियो ओलम्पिक में कांस्य पदक की स्पर्धा के अंतिम कुछ सेकेंड में साक्षी ने बेहतरीन वापसी कर जीत हासिल की। इस दौरान अपने अनुभव के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने दो-दो सेकेंड में खेल की बाजी पटलते देखा है और मेरे पास तो फिर भी नौ सेकेंड थे।”

साक्षी ने कहा, “मैंने यहीं सोचा था कि बस एक अंक और हासिल करना है और मुकाबले के अंतिम नौ सेकेंड में मैंने अपना बेहतरीन खेल दिखाया और कांस्य पदक हासिल किया।” दोहा में 2015 में आयोजित एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक विजेता साक्षी को पहलवानी की प्रेरणा उनके दादाजी बदलु राम से मिली, जो स्वयं एक पहलवान थे। उन्होंने 12 वर्ष की आयु से ही कुश्ती का प्रशिक्षण शुरू कर दिया था।

भारत के लिए रियो ओलम्पिक में कांस्य पदक जीतने से पहले और इसके बाद के अनुभवों की तुलना करते हुए साक्षी ने कहा, “मेरे ओलम्पिक खेलों से पहले और बाद की जीवन की स्थिति में काफी बदलाव आया है। हर कोई मुझे काफी खास महसूस कराता है। पूरा देश आज मुझे मेरे नाम से जानता है।” साक्षी ने कहा कि इस जीत के बाद से उन्हें काफी पुरस्कारों से नवाजा गया और कई दिग्गज एथलीटों से भी मिलने का अवसर मिला, जो उनके लिए काफी गर्व की बात है।

हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव की निवासी साक्षी के लिए हालांकि, कुश्ती में इस स्तर तक पहुंचना आसान नहीं था। उनकी इस जीत से राज्य के समाजिक वातावरण में बदलाव देखने को मिलेगा, इसकी संभावना के बारे में महिला पहलवान ने कहा, “यह जरूर होगा और मैं कहूंगी कि ऐसा हो रहा है।”

साक्षी ने कहा, “आपने देखा होगा कि पहले लड़कियां कुश्ती में इस प्रकार हिस्सा नहीं लेती थीं। लेकिन आज कई लड़कियां बैडमिंटन और कुश्ती में हिस्सा ले रही हैं। समाज में बदलाव हो रहा है, अब विकास की ओर बढ़ना बाकी है।” साक्षी ने कहा कि उन्हें इसके अलावा बास्केटबॉल भी काफी पसंद है और वह शौक के तौर पर इसे कभी-कभी खेल भी लेती हैं। इसके साथ उन्होंने कहा कि वह दिग्गज पहलवान सुशील कुमार की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और उन्हें उनसे ही प्रेरणा मिलती है।