नोट बंदी की घोषणा से देश ही नहीं विदेशों में भी मचा हाहाकार

नई दिल्ली। नोटबंदी की घोषणा के बाद पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर नेपाल में मौजूद 500 और 1,000 रुपये के भारतीय नोटों को वापस लेने का इंतजाम करने के लिए कहा। प्रचंड और मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत से नेपाली मीडिया को प्रचंड पर आरोप लगाने का मौका मिल गया।
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नेपाली मीडिया में प्रचंड पर आरोप लगाया गया कि माओवादी नेता ने भारत में छिपे अपने हितों के चलते भारतीय मुद्रा में एक अरब रुपये से अधिक की संपत्ति जुटा रखी है और अब नोटबंदी के बाद उन्हें उस पूरी संपत्ति के बर्बाद होने का डर सता रहा है।नेपाली मीडिया ने प्रचंड के अलावा 10 वर्ष से अधिक समय तक माओवादी आंदोलन चलाने वाले अन्य माओवादी नेताओं पर भारतीय मुद्रा में धन अर्जित करने का आरोप लगाया गया है।

उल्लेखनीय है कि भारत की 1,850 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े नेपाल में भारतीय मुद्रा विधिमान्य है। नेपाल में हर तरह के लेनदेन में भारतीय मुद्रा का प्रचलन खुलकर होता है।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 100 रुपये से अधिक मूल्य का नोट भारत से बाहर नहीं ले जाया जा सकता और भारतीय सीमा शुल्क अधिकारी इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन करते हैं।

आरबीआई के दिशा-निर्देशों में हालांकि 19 जून, 2014 को एक नया नियम जोड़ा गया, जिसके अनुसार कोई भी व्यक्ति 25,000 रुपये मूल्य से अधिक भारतीय मुद्रा भारत से बाहर नहीं ले जा सकता या इतने ही मूल्य की बाहरी मुद्रा भारत में नहीं ला सकता।नेपाल के केंद्रीय बैंक ‘नेपाल राष्ट्र बैंक’ (एनआरबी) ने बुधवार से 500 और 1,000 रुपये के भारतीय नोट बदलने और इसके लेनदेन पर रोक लगा दी है। आरबीआई के अनुसार हालांकि एनआरबी अब तक अवैध तरीके से ऐसा कर रहा था।

एनआरबी के अनुमान के मुताबिक, नेपाली अर्थव्यवस्था में परिचालित 500 और 1,000 रुपये के भारतीय नोटों का कुल मूल्य 3.36 करोड़ रुपये के करीब है।रोचक बात यह है कि विदेशों में रह रहे भारतीय अप्रवासियों ने भी इसी तरह का मांग की है और उन्होंने सुझाव दिया है कि उनके देशों में स्थित भारतीय दूतावासों में पुराने अमान्य भारतीय नोटों को बदलने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इंग्लैंड में रह रहे अप्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री मोदी से वहां नोट बदलने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को हालांकि अभी इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।चीन में भी रह रहे भारतीय कारोबारियों ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से नोट बदलने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है, लेकिन दूतावास अधिकारियों ने उन्हें भारत लौटने पर नोट बदलने की सलाह दी है।

वित्त विभाग को इसकी जानकारी पहले से ही थी, लेकिन नोटबंदी के बाद यह बहुत स्पष्ट तरीके से सामने आया है कि विदेशों में 500 और 1000 रुपये के भारतीय नोटों की बहुत बड़ी मात्रा पड़ी हुई है, और विदेशों में रह रहे अप्रवासी भारतीय अब उन पुराने अमान्य नोटों को बदलना चाहते हैं।