भारत के इस शहर में मिलेगा आपको फ्रांस जैसा मजा

नई दिल्ली। अगर आपकी तमन्ना फ्रांस घूमने की है और आप भी पैसों की तंगी की वजह से अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पा रहे है तो आज हम आपको भारत के ही एक ऐसे शहर के बारे में बताएगें जो आपकी इस तमन्ना को पूरी कर देगा। भारत का एक छोटा सा शहर पुडुचेरी जो दिल्ली से 2400 किलोमीटर दूर समुंद्र के किनारे बसा हुआ है।

पुडुचेरी के फ्रांस जैसा होने का कारण

असल में आज से 300 साल पहले पुडुचेरी पर फ्रांस के उपनिवेशको का राज था। उससे पहले पुडुचेरी में कुछ भी नहीं हुआ करता था। फ्रांस के शासको ने ही पुदुच्चेरी पर बंदरगाह बनवाया और इसको बिलकुल फ्रांस जैसा लुक दिया। इसलिए आपको यंहा फ्रांसीसी संस्कृति देखने को मिल जाएगी। फ्रांस के शासन के समय में यह वहां व्यापार का मुख्य केंद्र था।

आज का पुडुचेरी

पुडुचेरी में आज भी फ्रांस की झलक देखने को मिलती है। यह भारत का एक केन्द्र प्रशासित प्रदेश है। पुडुचेरी एक ऐसी जगह है जहां के हर कोने में शांति बसती है और शोर से मीलो दूर समुंद्र किनारे बसे इस शहर की लहरो में संगीत और फिजाओ में खुशबू बसती है। पुडुचेरी में आप भारत के इतिहास के बारे में जान पाएगें। साथ ही यंहा के मंदिरों मे आपको कुछ ना कुछ आकर्षक और अनोखा जरुर मिलेगा।

पुडुचेरी के आकर्षक केंद्र

पुडुचेरी का निर्माण बेहतर टाउन प्रणाली के अंतर्गत किया गया है। साथ ही यंहा फ्रांसीसियों के लिए जो कॉलोनी बनाई गई है उसे व्हाइट टाउन के नाम से जाना जाता है। अगर आप पुडुचेरी जा रहे है तो यह आपके लिए किसी टूरिस्ट प्लेस से कम नहीं है। आपको बता दें की यंहा का एयरपोर्ट भी सभी महानगरों से जुड़ा हुआ है। समुद्री तट पर बसा यह खूबसूरत शांत और एतिहासिक शहर के हर तरफ फ्रांसीसी सभ्यता की छाप दिखती है।

महापुरुषो की प्रतिमाएं

पुडुचेरी में बहुत से महापुरुषो की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। इसमें सबसे खास प्रतिमा भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है। यह प्रतिमा पुडुचेरी के प्रॉमिनाड बीच पर स्थापित है। इस वजह से यह बीच महात्मा गांधी बीच के नाम से भी जानी जाती है। तो अगर आप वंहा जा कर इस बीच का नाम भूल भी जाते है तब भी आपको ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं पढ़गी।

गांधी जी की प्रतिमा के ठीक सामने फ्रेंच वॉर मैमोरियल है जो प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए फ्रांसीसि सैनिको की याद में बनाया गया है। हर साल की 14 जुलाई को यंहा फ्रेंच डे के अवसर पर इन सैनिको को श्रधांजलि देते हुए एक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।

पुडुचेरी का समुद्री तट

पुडुचेरी के बीच के पास ही एक रोड है। इस रोड को बीच रोड के नाम से जाना जाता है। इस रोड पर यूं तो खूब चहल-पहल रेहती है लेकिन शाम के 6.30 बजे के बाद इस बीच पर टूरिस्ट की चहलकदमी के लिए इस रोड पर वाहनो की एंट्री बंद कर दी जाती है। पुदुच्चेरी की यह बीच भी वंहा के माहौल की तरह बहुत शांत और खूबसूरत है और इस बीच के ठीक सामने बनी इमारतों की दीवारों, बेंच, वॉलपोस्ट, आयरन ग्रिल यह सब फ्रांसीसी सस्कृति के साथ-साथ इस बीच की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। बीच के सामने की यह इमारतें पुडुचेरी के सचिवालय की है।

बिना हेलमेट करें बाइक राइड

आप पुडुचेरी में घूमने के लिए किराए पर बाइक या स्कूटी भी ले सकते है। साथ ही आपको बता दें कि यंहा पर हेलमेट लगाने का कोई रूल नहीं है। तो आप बिना हेलमेट लगाए बाइक पर यंहा के आस-पास के नजारों का लुफ्त उठाए।

सेक्रेड हार्ट चर्च

पुडुचेरी का सेक्रेड हार्ट चर्च यहां की खास जगाहों में से एक है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह चर्च 100 साल पुराना है। पुदुच्चेरी का यह चर्च इसी वजह से दुनिया भर में मशहूर है। साथ ही इस चर्च में तमिल और अंग्रेजी भाषा में अलग-अलग सय प्राथना होती है। इस चर्च की सजावट आपका भी मन मोह लेगी। इस चर्च का निर्माण 1902 में शुरु किया गया था और इसे पूरा होने में सात साल का समय लगा था। इस चर्च को 2007 में 100 साल हो गए है। इस चर्च का परिसर 50 मीटर लंबा और 48 मीटर चौड़ा है। साथ ही इस चर्च में 2000 लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं।

ली कैफे

अगर आप पुडुचेरी गए और वंहा की बीच पर बने इस ली कैफे में नहीं गए तो आपने क्या देखा वाली बात हो जाएगी। पुडुचेरी का यह कैफे वंहा का सबसे पसंदीदा हैंगआउट प्लेस है। यह कैफे सिर्फ पुडुचेरी का ही नहीं बल्की पूरे भारत का सबसे पुराना कैफे है। समुद्र के नजारे और खिड़कियों से आती ठंडी हवा ले कैफे के माहौल को एकदम आकर्षक बना देती है।

अदभुत मातृ मंदिर

अदभुत मातृ मंदिर पुडुचेरी से 15 किमी. दूर ऑरविल शहर का मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर को निर्माण 2008 में किया गया था। इस मंदिर को गोल और सुनहरे रंग का बनाया गया है। इस मंदिर को बनाने में 37 साल का समय लगा था। इसे जिस तरह से बनाया गया है वही इसका एक मुख्य आकर्षण है। इसमें चारों तरफ 12 पंखुड़ियां हैं। इसमें सुनहरे गोल डिस्क बने हैं, जिससे सूर्य की रोशनी परिवर्तित होकर अंदर पहुंचती है। यह विशाल आकृति चार स्तंभों पर खड़ी है, जो क्रमशः माहेश्वरी, महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती का प्रतीत है। यह मंदिर रविवार को छोड़कर हर दिन सुबह 9 से 1 बजे और 2 से 4.30 बजे तक खुला रहता है।

पुडुचेरी का बॉटेनिकल गार्डन

पुडुचेरी का बॉटेनिकल गार्डन देश के सबसे पुराने बॉटनिकल गार्डन में से एक है। इसे 1826 में आम जनता के लिए खोला गया था। इसकी स्थापना फ्रेंच नागरिक सीएस पैरोटेट के प्रयासों से की गई थी। बॉटनिकल गार्डन में टॉय ट्रेन भी चलती है जिसे टूरिस्ट काफी पसंद करते है।

कुलॉन मंदिर

पुडुचेरी में श्री गणेश का मनाकुला विलय कुलॉन मंदिर है। यह मंदिर 1673 से भी पहले का है। इस मंदिर का विशेष आकर्षण है। पुडुचेरी के लोगों का इस मंदिर को लेकर एक विश्वास है की यंहा का हाथी भक्तो से पैसे लेकर उन्हे आशीर्वाद देता है।