मिर्गी की बीमारी के लिए सबसे कारगर और सस्ता इलाज

कोच्चि। भारत में पहली बार मिर्गी जैसी बीमारी के लिए सस्ता इलाज खोज निकाला है और ये काम कोच्चि के एक अस्पताल के न्यूरो सर्जन ने किया है। इस इलाज में रेडियोफ्रीक्वेन्सी के जरिए मिर्गी के फोकस को सफलतापूर्वक नष्ट किया गया है। अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और रिसर्च सेंटर कोच्चि के डॉक्टर सिबी गोपीनाथ ने कहा कि 31 साल का एक मरीज कन्नूर से केरला हमारे पास इलाज कराने के लिए आया था जो कि पिछले 15 साल से मिर्गी की बीमारी से जूझ रहा था। जिसका इलाफ सिर्फ ऑपरेशन से ही होना संभव था।

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भारतीय विज्ञान जर्नल से डॉक्टर गोपीनाथ ने कहा एमआरआई के दौरान दिमाग में ऐसा कोई भी घाव नहीं दिखा जिसे देखकर ऐसा कहा जाए कि वो मिर्गी की वजह से हुआ है। जिसके बाद हम लोगों ने दिमाग में इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल किया ताकि ये पता चल जाए कि मिर्गी का दौरा उसे किस वजह से पड़ता है। इस सर्जरी के दौरान दिमाग में इलेक्ट्रोड डालकर कारण का पता लगाया जाता है।

इस सर्जरी के दौरान हमने देखा कि दिमाग में बाईं ओर एक जगह मिर्गी की वजह से तरंगे उत्पन्न हो रही थी जो कि इनस्यूलर रिजन के काफी करीब था जिससे कि स्पीच फेकल्टी खोने का खतरा लगातार बना हुआ था। उस समय हमने रेडियोफ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर प्रभावित ऊतकों को खत्म करने का फैसला किया। इसके साथ ही डॉक्टर गोपीनाथ ने न्यूरोलॉजिस्ट टीम की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर अशोक पिल्लई जो कि अमृता सेंटर फॉर मिर्गी से जुड़े हुए है, उनकी अध्यक्षता में नवीनतम प्रौद्योगिकी ब्रेन मैपिंग टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करते हुए स्टीरियो इलेक्ट्रोइंसीफैलोग्राफी के जरिए मिर्गी के दौरा पड़ने की मूल वजह और इसके फोकस बिंदु को रिकॉर्ड किया। पारंपरिक प्रक्रिया के विपरीत स्टीरियो ईईजी के जरिए खोपड़ी में इलेक्ट्रोरोड्स प्रक्रिया के दौरान पिनहोल्स डाले ताकि हम मस्तिष्क को खोलने से बच सकें।

इसके साथ ही डॉक्टर गोपीनाथ ने बताया कि इस सर्जरी के दौरान खोपड़ी को पूरी तरह से खोला नहीं जाता। ये हाई फ्रीक्वेन्सी रेडियो वेव्स मिर्गी फोकस को नष्ट करने का निशाना साधती है और उच्च आवृत्ति गर्मी को फोकस करती है। डॉक्टर गोपीनाथ ने कहा कि इस प्रक्रिया को पूरा करने में पूरे 2 घंटे का समय लगता है, इस दौरान मरीज पूरे होशो हवास में आपसे बात कर सकता है। इस सर्जरी के बाद मरीज को दो दिनों के बाद डिस्चॉर्ज कर दिया जाता है जिसमें केवल 7,000 रुपए का खर्चा आता है जो कि ओपन ब्रेन सर्जरी के एक लाख रुपए की अपेक्षा काफी कम है।

इस बीमारी के चलते एक मरीज ने अपनी पढ़ाई पूरी तरह से छोड़ दी थी और बिजली का काम करने लगा था लेकिन बाद में ज्यादा बीमारी के चलते काफी परेशान रहने लगा। लेकिन अब वो फिर से अपनी साधारण जीवन जी सकता है।भारत मिर्गी के वैश्विक बोझ का छठा हिस्सा है। 1000 में से करीब 12 लोग इस बीमारी से पीड़ित है और ये संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मिर्गी की बीमारी से दुनिया में लगभग 70 लाख लोग प्रभावित है जिनमें से 6 लाख लोग भारत से ही आते हैं।

बड़ी दुख की बात है कि भारत में मिर्गी के रोग से पीड़ित रोगियों को किसी भी प्रकार का इलाज नहीं मिल पाता है। मिर्गी की दवाओं के ज्ञान की कमी, गरीबी, सांस्कृतिक विश्वासों,कलंक , खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशिक्षित लोगों की कमी की वजह से आज इस बीमारी ने एक भयावह रुप ले लिया है। भारत में इस तरह की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सिर्फ 18 सेंटर्स है जहां पर एक साथ मिर्गी की बीमारी से पीड़ित 500 लोगों का इलाज हो सकता है लेकिन मरीजो की संख्या करीबन 3 लाख है जिन्हें असल में इस इलाज की जरुरत है।

nb-nair (एन बी नायर, सलाहकार संपादक)