रात में हुई सर्जरी वाले मरीजों के मरने की आशंका दोगुनी

ओटावा। जिन मरीजों का ऑपरेशन दिन की बजाय रात में होता है, उनकी मौत की आशंका दोगुनी होती है। एक शोध में यह बात सामने आई है। इस शोध का मकसद शल्य चिकित्सा के बाद और शल्य चिकित्सा के दिन के बीच मृत्यु दर के संबंध का पता लगाना था। इसके लिए शोधकर्ताओं ने सभी शल्य चिकित्सा की प्रक्रियाओं का पांच सालों तक मूल्यांकन किया। साथ ही 30 दिनों तक शल्य चिकित्सा के बाद अस्पताल के मृत्यु दर की समीक्षा की।

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इसके तहत शल्य चिकित्सा में आई बाधाओं के आधार पर और काम के समय को तीन भागों दिन, शाम और रात के तहत बांटकर आंकड़े जुटाए गए। इसके तहत 40,044 अस्पतालों में 33,942 मरीजों की 41,716 विशेष और आपातकालीन शल्य चिकित्सा का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों की शल्य चिकित्सा रात को हुई, उनमें दिन की तुलना में मरने की आशंका 2.17 गुनी ज्यादा थी। इसी तरह दोपहर बाद शल्य चिकित्सा किए गए मरीजों के मरने की आशंका 1.43 गुनी रही।

मैकगिल विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र के सहायक प्रोफेसर माइकल टेस्सलर ने कहा कि अमेरिकी सोसाइटी ऑफ एनेस्थियोलाजिस्ट (एएसए) की गणना और मरीजों की आयु और दूसरे कारकों आदि अध्ययन से पता चलता है कि शाम और देर रात की गई आपातकालीन शल्य चिकित्सा में ज्यादा मृत्युदर रही। टेस्सलर ने कहा कि शल्य चिकित्सा के 30 दिन बाद अस्पताल की मृत्युदर में बेहोश करने और दूसरे कारकों को भी खतरे में शामिल किया गया। इस शोध का प्रकाशन पत्रिका ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ एनेस्थिसियोलाजिस्टस’ और वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट में (डब्ल्यूसीए) किया गया।