विधि- विधान से करें नवरात्र में मां की भक्ति, सहवास और बुरे काम से बचें

नवरात्रों में मां के नौ स्वरुपों की पूजा अर्चना की जाती है।मां का हर रुप अपने भक्तों पर कृपालु है, ऐसी मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां की भक्ति करने वाले लोग सभी प्रकार से कष्टों से मुक्ति पाते हैं और अपना जीवन सफल बनाते हैं। मां दुर्गा अपने भक्तों पर कृपा करने वाली है, जो भक्त पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ मां की इन दिनों में भक्ति करता है, पूजन करता है मां उसपर प्रसन्न होती हैं और उसके सारे मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। इन नौ दिनो मां की भक्ति करना और पूजन करना लाभकारी माना गया है, पर यह जानना भी जरुरी है कि भक्ति का सही तरीका क्या है जिसके माध्यम से आप मां को खुश कर सकते है।

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भक्तगण इन नौ दिनों मंे मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, पूजा पाठ करते हैं और अपनी श्रद्धानुसार मां की भक्ति करते हैं पर नवरात्रांे में हर कार्य का विधि और विधान निर्धारित है जिसके अनुसार व्रत और पूजा पाठ करना चाहिए। नवरात्रों में अगर नियम के साथ पूजा नहीं किया जाता है तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है। आइए आज आपको बताते है कि नवरात्रों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

शारीरिक और मानसिक पवित्रता जरुरी- नवरात्र शुद्धता से जुड़ा पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक पूर्ण पवित्रता और सात्विकता बनाए रखते हुए देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करने का विधान है। नौ दिन तन और मन से उपवास रखें। मां के श्री स्वरूप अथवा चित्रपट के प्रतिदिन वस्त्र बदलें और सुंदर श्रृंगार करें। घर में माता की अखंड ज्योत प्रज्जवलित करने से मां स्वयं उस घर की रक्षा करती हैं।मन, वचन व कर्मों से शुद्धता बनाए रखें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और खानपान में भी शुद्धता का ध्यान रखें।

जमीन पर सोएं। घर पर ही भोजन करें और घर पवित्र रखें। नवरात्र करने वाले गृहस्थ को अपने घर में अपनी श्रद्धा व क्षमतानुसार व्यवस्था कर लेनी चाहिए। घर में कलश स्थापना कर, इष्ट की मूर्ति व तस्वीर रख उनसे संबंधित मंत्रों का जाप या पाठ करना चाहिए। अलग-अलग देवताओं के मंत्र जाप व पाठ से फल भी अलग-अलग ही मिलते हैं। इसलिए दुर्गा पाठ के साथ यदि हो सके, तो अपने इष्ट की आराधना जरूर करें।

                                                                     नवरात्रों में क्या न करें, जानने के लिए अगले पेज पर जाएं

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