माथे पर लगा टीका करेगा सौ काम

नई दिल्ली। तिलक किसी के भी माथे पर लगता है तो उसका चेहरा काफी दमकने लगता है। अगर हिंदू धर्म की बात करें तो ये एक ऐसा धर्म है जहां के रीति रिवाज हमेशा से ही चर्चा का विषय बने रहते है। शादी -ब्याह हो या कोई भी फंगशन माथे पर तिलक लगाने की परंपरा निभाई जाती है। ये एक ऐसी परंपरा है जिसे काफी सालों से हिंदू धर्म में निभाया जा रहा है। लेकिन क्या आपको पता है माथे के मध्य में टीका लगाना से एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है जिसकी वजह से टीका का महत्व काफी बढ़ जाता है।

kumkum

टीका माथे के मध्य भाग में लगाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि माथे के बीच में श्री हरि का स्थान होता है। इसे शुभ कामों का प्रतीक भी माना गया है और ज्यादातर इसे लगाने के लिए कुमकुम , चंदन और रोली का इस्तेमाल किया जाता है जिसके ऊपर चावल लगाने से इसे पूर्ण कहा जाता है।

टीके के ऊपर चावल लगाने का भी एक विशेष महत्व है क्योंकि चावल को शांति का प्रतीक कहा गया है इसलिए तिलक के बाद चावल लगाने का प्रचलन है। मस्तिष्क के जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है उसे आज्ञाचक्र कहा जाता है यहां पर पीनियल ग्रंथि होती । ये पीनियल ग्रंथि तिलक लगाने के बाद उत्तेजित होती है जिसके बाद मस्तिष्क के अंदर दिव्य प्रकाश की अनुभूति होती है। इसके साथ ही लाल कुमकुम ऊर्जा का प्रतीक माना गया है जिसको लगाने से मानसकि शांति की अनुभूति होती है और दिमाग एकाग्रचित रहता है।