‘सौभाग्य का सूचक’ है मेंहदी…

नई दिल्ली। वैसे तो मेंहदी लगाना सभी महिलाओं और कुंवारी लड़कियों को पसंद है। फिर चाहे मौका किसी की शादी का हो, इंगेजमेंट का हो या फिर कोई त्योहार इन सभी मौकों पर घर की महिलाएं और लड़कियां सबसे पहले अपने हाथ में मेंहदी लगाती है। मेंहदी सिर्फ एक रंग ही नहीं होता बल्कि इसका संबंध परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। खासकर इसका महत्व शादी शुदा महिलाओं के लिए ज्यादा बढ़ जाता है। ज्यादातर महिलाएं शादी के उत्सव में अपने हाथ पर मेंहदी लगवाती है जो कि एक शुभ संकेत के अलावा खुशियों का भी प्रतीक माना जाता है।

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सौभाग्य का प्रतीक है मेंहदी:-

हाथों में मेंहदी लगाने का खास महत्व है और अगर ये मेंहदी करवाचौथ के दिन लगाई जाए तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। मेंहदी के महत्व के बारे में फोन पर भारत खबर से बात करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज्योतिष के प्रोफेसर डॉ राजेश त्रिपाठी ने कहा कि मेंहदी शब्द हिंदी का शब्द नहीं है बल्कि ये शब्द किसी अन्य भाषा से संबंधित है। इसको कुछ लोग मेंहदी, हिना तो कुछ इसे महावर के नाम से भी जानते हैं। महावर मेंहदी जैसी ही होती है लेकिन मेंहदी नहीं होती। इसके साथ ही ऐसी मान्यता है कि मेंहदी हमेशा सौभाग्य की सूचक होती है। धर्म सिंदूर नामक एक ग्रन्थ है जिसमें इस बात का वर्णन मिलता है कि जब मेंहदी का रंग किसी भी स्त्री पर बहुत ज्यादा चढ़ता है तो उसका सौभाग्य अटल होता है। इसके साथ ही ज्योतिफ प्रोफेसर ने बताया कि मेंहदी ही एक ऐसा रंग है जो सौभाग्य का प्रतीक होने के साथ-साथ महिलाओं के रुप को निखारने का काम करता है।

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एक मात्र रंग है जो सौभाग्य के साथ निखारता है रुप:-

इसके साथ ही राजेश त्रिपाठी ने बताया कि सौभाग्य का सूचक होने की वजह से ही शादी के कार्यक्रम के दौरान शादी से ठीक एक दिन पहले लड़की के हाथ में मेंहदी लगाई जाती है। इसके साथ ही कुछ जगहों पर मेंहदी को अलग-अलग तरह से भी इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग मेंहदी से हाथ पर स्वास्तिक बनाने के बाद ही शुभ कार्यों को करते हैं। ये एक ऐसी परंपरा है जिसे शादी शुदा स्त्री के अलावा अविवाहित लड़की भी लगाती है।

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यहां तक की ये भी कहा जाता है कि जब राधा जी ने महावर और मेंहदी लगाया था और उसके बाद बरसाने में विषभान कुंड के पास तालाब में जब मेंहदी और महावर को धुला तो पूरे तालाब का रंग ही पीला हो गया था जिस वजह से उसका नाम पीलीपोखर पड़ा।तो मेंहदी सौभाग्य के सूचक के साथ-साथ एक ऐसे परिधान के रुप में भी प्रयोग किया जाता है जो कि हमारे सौन्दर्य -सौभाग्य के अलावा आने वाले जीवन में सुख-समृद्धि और लक्ष्मी की निरंतर कृपा बनी रहे इसलिए भी मेंहदी को प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही मेंहदी को सुआगमन वस्तु के रुप में माना जाता है।

बाजारों में बढ़ी भीड़:-

करवाचौथ के त्योहार को लेकर बाजारों में इस समय भीड़ काफी बढ़ गई है। महिलाएं कपड़े, गहने और मेंहदी लगवाने से लेकर सभी चीजों की खरीदारी करने के चलते बाजारों में रौनक साफतौर पर देखी जा सकती है। इस त्योहार के चलते कपड़ो की दुकानों और ज्वैलरी शॉप करवाचौथ और दीवाली के त्योहार के चलते न केवल नया कलेक्शन लेकर आए है बल्कि उसे अच्छे दामों में भी बेंच रहे हैं।

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मेंहदी लगवाने के बढ़े रेट:-

त्योहारों के चलते बाजार में मेंहदी लगाने वाले मेंहदी लगवाई के रेट भी काफी बढ़ देते  है। मेंहदी के रेट उसकी डिजाइन पर निर्भर करते है। इस दिन एक हाथ पर मेंहदी अरेबिक स्टाइल में लगवाने के रेट 200 से 250 तो वहीं पूरे भरे हाथ की मेंहदी लगवाने पर रेट 1100 से 2100 तक पहुंच जाते हैं।

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rajesh-tripathi (डॉ राजेश त्रिपाठी, दिल्ली यूनिवर्सिटी ज्योतिष प्रोफेसर)