आखिर शरद पूर्णिमा की रात आकाश से क्यों बरसेगा अमृत

नई दिल्ली। शास्त्रों के अनुसार अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता और हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार इस पूर्णमा का विशेष महत्व है। इस दिन लोग माता लक्ष्मी की पूजा करके उपवास करते है और अपने परिवार की खुशहाली सहित धन्य-धान्य की कामना भी करते हैं। इस बार 15 अक्टूबर यानि की आज शरद पूर्णमा है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है और इसीलिए लोग चांदनी रात में अपने घरों की छतों पर खीर रख देते है और उसे प्रसाद के रुप में ग्रहण कर खुद को धन्य मानते हैं।

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चांदनी रात में खीर रखने का विशेष महत्व:-

शास्त्रों के अनुसार इस दिन चांद की रोशनी अमृत वर्षा करती है यानि कि शरद पूर्णिमा के दिन चांद की किरणें विशेष गुणों से युक्त हो जाती है जिसमें कई बीमारियों का नाश करने की क्षमता होती है इसी वजह से लोग चांद की रोशनी में अपनी छतों के ऊपर खीर बनाकर रख देते है जिससे कि चांद की किरणें खीर पर पड़ सकें। उसके बाद दूसरे दिन लोग इस खीर को प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं।

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जानिए भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी मान्यता :-

इसके साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात में ये देखने के लिए निकलती है कि कौन सो रहा है और कौन जग रहा है और उसी के अनुसार वो उसका कल्याण करती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार माता लक्ष्मी इस दिन जिसको जागता हुआ पाती है उसका कल्याण करती है और जो उन्हें सोता हुआ मिलता है उसके पास वो कभी भी ठहरती नहीं है। वहीं शास्त्रों में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था।

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जानिए खीर का मनोवैज्ञानिक पहलू:-

शास्त्रों के अनुसार जहां खीर खाने को अमृतमयी बताया गया है तो वहीं इसे मनोवैज्ञानिक रुप से भी जोड़कर देखा गया है। ऐसा माना जाता है कि यही समय है जब मौसम में परिवर्तन होता है और ठण्ड के मौसम की शुरुआत होती है।

करें इस मंत्र का जाप:-

ऐसा कहा जाता है कि चांदनी रात में लगभग रात्रि 9 से 12 बजे तक खीर को किसी चीज से ढककर रख देना चाहिए और इसका सेवन करने से पहले 21 बार ॐ नमो नारायणाय का जाप करना चाहिए।