टाटा संस ने साइरस मिस्त्री के आरोपों पर किया पलटवार

मुंबई। टाटा संस ने अपने पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री के आरोपों पर गुरुवार को पलटवार करते हुए एक बयान में कहा कि कंपनी से निकाले गए अध्यक्ष साइरस पी.मिस्त्री न केवल बोर्ड के एक गुप्त पत्र को लीक करने में शामिल रहे, बल्कि उन्होंने दुर्भावनापूर्ण आरोप भी लगाए हैं, जिससे समूह की छवि और इसके मूल्यों को ठेस पहुंची है। मिस्त्री द्वारा कंपनी को लिखे गए पत्र के एक दिन बाद कंपनी ने आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि वह साइरस मिस्त्री थे, जिन्होंने बोर्डरूम के कायदों को नजरअंदाज किया। बयान के मुताबिक, “यह बेहद खेद का विषय है कि टाटा संस बोर्ड के सदस्यों के लिए गोपनीय जानकारियों को बेहद अनुचित व मर्यादाहीन तरीके से सार्वजनिक किया गया।” टाटा समूह के प्रवक्ता देबाशीष रॉय ने जारी बयान में कहा, “पत्र में बेबुनियाद दावे तथा टाटा समूह, टाटा संस बोर्ड तथा टाटा की कई कंपनियों तथा कुछ सम्मानित व्यक्तियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं।” बयान में कहा गया है, “इन सब से उचित तरीके से निपटा जाएगा।”

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टाटा संस ने कहा, “मिस्त्री ने समूह की छवि को कर्मचारियों के सामने ठेस पहुंचाने का प्रयास किया, जो अक्षम्य है।” बोर्ड को लिखे पत्र में मिस्त्री ने आरोप लगाया था कि बोर्ड द्वारा लिए गए कुछ कारोबारी फैसले से 118,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को मिस्त्री को समूह पद से हटाकर रतन टाटा को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है।

बयान के मुताबिक, “टाटा संस बोर्ड के निदेशक कुछ कारोबारी मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे थे और मिस्त्री के साथ बढ़ते अविश्वास को लेकर टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की चिंताएं बढ़ती ही जा रही थीं। लेकिन इन मुद्दों का समाधान नहीं किया जा रहा था। जिसके बाद टाटा संस बोर्ड ने एक साथ मिलकर मिस्त्री को हटाने का फैसला लिया।”

समूह ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मिस्त्री ने कई तथ्यों को लेकर बोर्ड का विश्वास खोया और यही कारण है कि विश्वास में आ रही कमी को लेकर ट्रस्टियों की चिंता बढ़ने लगी, जिसका समाधान नहीं किया जा रहा था। टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी समूह ने फिलहाल इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा है कि वे मिस्त्री को हटाए जाने के हालात का अध्ययन कर रहे हैं।

बाजार पर निगरानी रखने वाली संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मिस्त्री के खुलासों की सत्यता की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कॉरपोरेट गवर्नेस, लिस्टिंग नॉर्म्स एंड रेग्युलेशंस का उल्लंघन तो नहीं हुआ या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। सूची में शामिल टाटा समूह की लगभग 29 कंपनियों ने मिस्त्री के आरोपों पर स्टॉक एक्सचेंज के सवालों का जवाब दिया। भारतीय बाजार में समूह की कई कंपनियों के शेयरों का गिरना जारी है।

इंडियन होटल्स के शेयर में 5.27 फीसदी, टाटा केमिकल्स के शेयर में 1.98 फीसदी, टाटा मोटर्स के शेयर में 1.44 फीसदी, टाटा स्टील के शेयर में 0.44 फीसदी, टाटा पावर में 1.36 फीसदी तथा वोल्टास में 0.90 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर में 0.68 फीसदी की बढ़त देखी गई।