रिलायंस समूह डसॉल्ट के साथ नया उपक्रम खोलेगा

मुंबई। भारत के रक्षा अंतरिक्ष क्षेत्र के एक सर्वाधिक बड़े समायोजन (ऑफसेट) सौदे के तहत अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने सोमवार को फ्रांस की कंपनी दासौ एविएशन के साथ एक नया उद्यम शुरू करने की घोषणा की। लड़ाकू विमान राफेल और व्यावसायिक विमान फाल्कन बनाने वाली इस कंपनी के साथ नए उपक्रम में करीब 30 हजार करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस नामक यह संयुक्त उपक्रम समायोजन शर्तो को अमलीजामा पहनाने वाला एक प्रमुख उद्यम होगा। उल्लेखनीय है कि भारत ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पिछले माह करार पर हस्ताक्षर किए हैं, जो करीब 59 हजार करोड़ रुपये का सौदा है। रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने कहा, “यह भारतीय विमान निर्माण तकनीक क्षेत्र और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर की अनुषंगी रिलायंस एयरोस्पेस के लिए एक कायापलट करने वाला क्षण है।”

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डसॉल्ट एविएशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इरिक ट्रैपियर ने कहा, “नए उपक्रम ने भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत उनकी कंपनी की रणनीतिक औद्योगिक साझेदारी विकसित करने की प्रतिबद्धता की व्याख्या की है।”भारत और फ्रांस के सौदे के 50 प्रतिशत ऑफसेट शर्त को भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। यह करार डसॉल्ट के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ है। कंपनी के बयान के अनुसार, “डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ नीति को बढ़ावा देने के अलावा उच्चस्तरीय तकनीकी हस्तांतरण के साथ प्रमुख भारतीय कार्यक्रमों को भी विकसित करेगी, ताकि देश के पूरे विमान निर्माण तकनीक क्षेत्र को लाभ हो।”इस साझेदारी में भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर की नई पहल ‘स्वदेश में डिजाइन तैयार करना, विकसित करना और निर्माण’ के कार्यक्रम के तहत शोध एवं विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

डसॉल्ट पिछले 60 वर्षो में अबतक 800 से अधिक सैन्य एवं नागरिक विमान 90 से भी अधिक देशों को दे चुकी है। ये विमान करीब 2.80 घंटे उड़ान भर चुके हैं। पिछले साल उसका राजस्व 4.20 अरब यूरो था। बहुत मोलभाव और बातचीत के बाद फ्रांस और भारत के बीच पिछले हफ्ते 36 राफेल विमानों की खरीद का करार हुआ। ये कई भूमिकाएं निभाने वाले लड़ाकू विमान हैं। मूल निविदा 126 विमान खरीदने के लिए थी। इस करार पर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और फ्रांस के उनके समकक्ष जीन येवेस ली ड्रायन ने हस्ताक्षर किए। डसॉल्ट ने मिराज 2000 विमानों की आपूर्ति करके भारत में खुद को स्थापित किया। राफेल को भारत ने वर्ष 2012 में चुना था। प्रतिस्पर्धी निविदा की यह प्रक्रिया वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। 30 जून, 2016 तक दुनिया भर 152 राफेल विमान दिए गए हैं।