समाजवादी महाभारत की पूरी दास्तां…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सोमवार को समाजवादी पार्टी में मचे घमासान में एक के बाद एक नये पड़ाव देखने को मिले। बैठक से पहले जहां एक ओर अखिलेश और शिवपाल समर्थकों में मारपीट होती दिखी तो इसके बाद पार्टी के ऑफिस पर लगातार विधायकों और नेताओ की आवाजाही पर सभी की निगाहें टिकी रही।

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अखिलेश ने की भावुक अंदाज से शुरूआत
मैं नई पार्टी क्यूं बनाऊंगा, जब समाजवादी पार्टी ने 25 साल पूरे किए तो मैं अलग जा कर पार्टी क्यूं बनाऊं। नेता जी ही मेरे पिता ही नहीं मेरे गुरू हैं। कई लोग गलतफहमियां पैदा कर रहे हैं। मेरे काम पर चुनाव है टिकट मैं ही बांटूंगा, मैंने पूरे समय जनता की भलाई के लिए काम किया है।

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बोलते बोलते अखिलेश भावुक हो गये उन्होने कहा कि नेताजी ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया है । मैं उनके आदेश से मुख्यमंत्री बना हूं। वो मेरे पिता हैं और मै उनका बेटा हूं। नेता जी आपने सिखाया है अन्याय के खिलाफ लड़ना । मैंने नेता जी आपके दिए हर काम को समय से पूरा किया है। वो मुझसे कहें तो मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं। कहते कहते अखिलेश भावुक हो रो पड़े।

शिवपाल ने आक्रमक रूख में किया दर्द बयां
पार्टी के मीटिंग के वक्त मैंने अध्यक्ष पद छोड़ा था,अखिलेश को नेताजी ने अध्यक्ष बना दिया था। मेरे पार्टी में कार्यकाल पर विपक्ष के लोगों ने मेरे काम की तारीफ की,3 साल पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष रहा। क्या सरकार में मेरा कोई योगदान नहीं, क्या मेरे विभाग में अच्छे काम नहीं हुआ। मैंने हर आदेश नेताजी का माना है मैने हर आदेश सीएम का माना है ।

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कहते कहते सीधा अखिलेश से हमला बोला कहा नेताजी अखिलेश ने अलग दल बनाने की बात कही मैने कमस खा कर कह सकता हूं। मैं अपने बेटे की कसम खाता हूं। अखिलेश ने अलग पार्टी बनाने को कहा था। अखिलेश ने कहा था दूसरे दल के साथ मिलेंगे। मैं गंगा जल लेकर कसम खा सकता हूं। कहा कि दूसरे दल के साथ सरकार बनेंगी। अब इस पार्टी में रामगोपाल की दलाली नहीं चलेगी। 2003 में अमर सिंह कीममद से सरकार बनी थी। कुछ लोग तो अमर सिंह की पैरों की धूल के बराबर तक भी नहीं।

मुलायम बेटे पर सितम और भाई दोस्त पर रहम बरपाया
नेता जी ने अपने सम्बोधन की शुरूआत अपने और शिवपाल के संघर्षों से शुरू की कहा कि में लोहिया जी के रास्ते पर चल कर आगे बढ़ा। इमरजेंसी के दौरान जेल में रहा,गरीबो और किसानों के लिए संघर्ष किया। कौन नहीं जानता कि पार्टी बनाने में बहुत संघर्ष किया है। आज पार्टी की कलह से आहत हूं। पार्टी बनाने के लिए हमने लाठियां खाई,जो उछल रहे एक लाठी झेल नहीं पाएंगे।

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इसके बाद तो वो अखिलेश के ऊपर बिफर पड़े कहा कि पद मिलते ही दिमाग खराब हो गया है। क्या जुआरियों,शराबियों की मदद कर रहे हो?,नारेबाजी करने वालों को बाहर करेंगे। तुम अमर सिंह को गाली देते हो,अमर सिंह ने मेरी बहुत मदद की। मै उनके खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकता। वो मेरे भाई जैसे हैं। शिवपाल यादव आम जनता के नेता हैं। ओम प्रकाश के ऊपर कितनी लाठिया पड़ी है तुमको पता है क्या आज तभी ओम प्रकाश मेरे साथ है।

नेताजी ने मंच पर की मिलन की कोशिश
लगातार सपा सुप्रीमो ने अखिलेश को फटकार लगाते हुए एक के बाद एक नसीहत दे डाली। फिर कहा कि शिवपाल वो है जो चुनाव जिता भी सकता है और हरा भी सकता है। फिर अखिलेश से कहा शिवपाल चाचा है तुम्हारे उठो लगे लगो और फिर अखिलेश को बोला जाओ चाचा के गले लगो फिर दोनों को गले लगवाया। फिर अखिलेश यादव ने शिवपाल के पैर छुए।

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नेताजी की कोशिश हुई विफल
अखिलेश मिलने के बाद उठे और मंच पर माइक थामा और फिर अमर सिंह के षड़यत्र पर जैसे ही बोलना शुरू किया । और टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर का हवाला देते हुए कहना शुरू ही किया था कि तुरंत ही चाचा शिवपाल ने सीएम से माइक छानते हुए कहा सीएम झूठ बोल रहे है। फिर क्या था जो हुआ वो सबके सामने था। फिर इस नये घटनाक्रम के किरदार आशु मलिक से भी समर्थकों और लोगों की हाथापाई हुई। क्योंकि आशु मलिक ने टाइम्स ऑफ इंडिया को खबर के खंडन करने और गलत तरीके से खबर छापने पर पत्र लिखा था। इसके बाद जो कुछ क्षणों में मिलन का मंच था वो बगावत का मंच बन गया। फिर दिल मिलते मिलते रह गये और नेता जी के इस फार्मूले पर पानी फिर गया।

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दुबारा फिर हुई मिलन की कोशिश
उधर नेताजी के आवास पर आनन-फानन में मीटिंग हुई । सभी वरिष्ठों की फिर गहमागहमी बढ़ी शिवपाल और सीएम अखिलेश भी शामिल हुए। एक बार फिर समझौते की कोशिशों का दौर चला। नेताजी ने हंगामें पर नाराजगी जताई। और हंगामा करने वालों को दंण्डित करने की बात कही। फिर अचानक की सूत्रों के हवाले से खबर आई किसी बात पर नेताजी और अखिलेश में बहस हुई अखिलेश आवास के बाहर निकले और चले गये । फिर शिवापल भी रवाना हुए । बीते 48 घंटों के दौरान समाजवादी पार्टी जिस दौर और हालात से गुजर रही है । फिलहाल उसका इन सबसे निकला कब तक मुमकिन हो पाता है। लेकिन आज के झगड़े से ये साफ हो गया कि बिखराव एक होने में अभी कोई किरण नहीं दिख रही।

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परिवार के विवाद पर विपक्ष का तंज
भाजपा के सुधाशु त्रिवेदी ने जहां इसे पुत्र के प्रति नेताजी का मोह को बताया इस झगड़े की जड़ वहीं कांग्रेस ने कहा कि हम इस समय अखिलेश के साथ पूरी सहानभूति रखते है। हम अखिलेश के साथ खड़े है। वहीं भाजपा के ओम माथुर ने इसे गलत करार देते हुए कहा इससे पार्टी का छवि के साथ अखिलेश की छवि को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल विपक्ष के तंज और पार्टी की कलह तो मुलायम और अखिलेश झेल ही रहे हैं। पर अब सबसे बड़ी चिन्ता है आगामी विधान सभा चुनावों की क्योंकि उनका ये रगड़ा जनता के सामने एक बड़े घमासन के तौर पर उबरा है।

शाम होते होते आया एक नया ड्रामा
दिन भर की समाजवादी गहमागहमी के बाद शाम को भी इस हंगामे में राहत नहीं मिली सपा के एमएलसी आशु मलिक ने मुख्यमंत्री आवास में अपने पीटे जाने का आरोप पवन और भदौरिया पर लगा दिया। साथ ही शाम तक रामगोपाल ने भी बयानजारी कर शिवपाल पर हमला बोल दिया। कहा कि शिवपाल में दम हो तो पब्लिक मीटिंग में लगाते आरोप पार्टी फोरम पर कोई भी बोल लेता है।

फिलहाल समाजवादी पार्टी में मचे महाभारत ने जहां अपनों के दिलों में पड़ी दरार को आज सार्वजनिक कर दिया वहीं इस घटनाक्रम से ये भी साफ हो गया कि अखिलेश अब बड़े हो गये हैं। वे जानते हैं कि क्या करना है और क्या नहीं पर बड़े अब बच्चों की तरह मेरा तेरा के खेल खेल रहे हैं।

piyush-shukla(अजस्रपीयूष शुक्ला)