जानिए बच्चों के चाचा ‘पंडित जवाहर लाल नेहरु’ के बारे में…

नई दिल्ली। 14 नवंबर एक ऐसी तारीख है जिसे सुनकर बच्चों की याद आती है…ये वो तारीख है जिस दिन देश के पहले प्रधानमंत्री ने जन्म लिया था और जिन्हें बच्चे बेहद प्यार करते थे। जी हां…आप सही समझ रहे है आज देश के पहले प्रधानमंत्री और बच्चों के चाचा कहे जाने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरु की 127वीं वर्षगांठ है और इसे पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। चाचा नेहरु को बच्चों से काफी लगाव था जिस वजह से उनके जन्म दिन को बाल दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। पंडित जवाहर लाल नेहरु का नाम देश के उन नेताओं में शुमार है जो महात्मा गांधी के साथ देश को आजाद कराने की लड़ाई में सहायक के तौर पर शामिल थे और जो अंत तक भारत को आजादी दिलाने के लिए लड़ते रहे।

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अतिसंपन्न परिवार से तालुल्क रखते थे नेहरु:-

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु का जन्म 14 नवंबर 1889 में इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता मोतीलाल नेहरु एक जाने-माने वकील और समाजसेवी थे। ऐसा कहा जाता है कि उनेक पिता किसी भी बड़ी समस्या को चुटकियों में हल कर देते थे। इनकी माता का नाम स्वरुप रानी नेहरु था जिनकी तीन बेटियां भी थी। नेहरु मूल रुप से कश्मीरी वंश के सारस्वत ब्राह्मण थे। कहा जाता है कि नेहरु जी के परिवार में किसी भी तरह की धार्मिक कट्टरता और भेदभाव नहीं किया जाता था जिस वजह से वो प्रत्येक धर्म के त्योहारों को बड़ी जिज्ञासा के साथ देखा करते थे। बचपन में जवाहर लाल नेहरु का समय ज्यादातर मुंशी मुबारक अली के साथ गुजरता था और वो उनको रानी लक्ष्मीबाई, तात्याटोपे जैसे सूरमाओं की कहानियां सुनाया करते थे जिन्हें वो काफी दिलचस्पी लेकर सुनते थे।

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हैरो और लंदन से पूरी की शिक्षा:-

जवाहर लाल नेहरु ने देश के कुछ नामचीन शिक्षण संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी लंदन से पूरी की। इसके बाद लॉ की पढ़ाई फेमस कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से की। उच्च लेवल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद नेहरु जी ने इलाहाबाद के उच्च न्यायालय में शामिल हुए और पिता के नेतृत्व में वकालत करना शुरु कर दी जिसे लोगों द्वारा काफी सराहा गया। धीरे-धीरे जवाहर लाल नेहरु जी की वकालत काफी चलने लगी लेकिन उनका मन वकालत से हटकर देश भक्ति की तरफ होने लगा और कुछ समय बाद वकालत को त्याग कर को वो पूरी तरह से देशभक्ति के रंग में रंग गए।

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राजनीतिज्ञ के साथ-साथ अच्छे लेखक थे नेहरु:-

जवाहर लाल नेहरू एक अच्छे राजनीतिज्ञ होने के साथ साथ एक अच्छे लेखक भी थे। इन्होंने डिस्कवरी ऑफ इंडिया नामक किताब लिखी थी। इनकी इस किताब पर श्याम बेनेगल ने साल 1980 में एक टीवी शो भी बनाया था जिसका नाम ‘भारत- एक खोज’ रखा गया। नेहरु जी का भारत की आजादी में खास योगदान है। सितंबर 1946 में उन्हें वाइसरॉय एक्सीक्यूटिव काउंसिल का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही आईआईटी खड़दपुर की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। देश के इस महान नेता की मृत्यु 27 मई 1964 को अचानक तबियत बिगड़ जाने के चलते हुई थी।

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