…यहां जानिए रावण के दस सिरों का रहस्य

नई दिल्ली। रावण एक ऐसा पात्र है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने काम करता है। किसी भी कृति के लिये नायक के साथ ही सशक्त खलनायक का होना भी आवश्यक है। मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे ,वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, महापराक्रमी, अत्यन्त बलशाली, अनेकों शास्त्रों का ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था इसलिये उसे सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि रावण के दस सिर थे, कुछ विद्वानों के अनुसार रावण अपार मायावी शक्तियों का स्वामी था। जिसके द्वारा वह दस सिरों के होने का भ्रम पैदा कर सकता था । यही वजह थी कि रावण को दसानन के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में रावण को गले में नौ मणियों धारण करने की बात का उल्लेख किया गया है कहा जाता है कि इन्हीं मणियों के कारण रावण के दस सिर दिखाई देते थे, इसीलिए रावण को दसकंठी भी कहा जाता है।

रावण चारों वेदों और असीम आसुरी विद्या का ज्ञाता था रावण की शक्तियों और दस सर होने की बात रामचरितमानस में भी कही गई है। रावण के दस सिर होने की चर्चा रामायण में आती है। वह कृष्णपक्ष की अमावस्या को युद्ध के लिये चला था और एक-एक दिन एक-एक सिर कटते हैं। इस तरह दसवें दिन शुक्लपक्ष की दशमी के दिन रावण का वध होता है। रामचरितमानस में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस सिर को राम अपने बाण से काट देते हैं उसके जगह पर दूसरा सिर उभर आता था।

विचार करने की बात है कि क्या एक अंग के कट जाने पर वहां नया अंग उत्पन्न हो सकता है? मारीच का चांदी के बिन्दुओं से युक्त स्वर्ण मृग बन जाना, रावण का सीता के समक्ष राम का कटा हुआ सिर रखना आदि से सिद्ध होता है कि रावण मायावी थे। रावण के दस सिरों का एक कारण यह भी माना जाता है कि रावण में दस लोगों का बल और बुद्धि थी ।

रावण के दस सिर उसके चारों वेदों और छह शास्त्रों के ज्ञानी होने का प्रतीक है। दूसरे शब्दों मे रावण के दस सर इन दस बातों का उल्लेख करता है- क्रोध, मोह, गौरव, काम, बुद्धि ,अहंकार, मानस, अमानवता,अन्याय, रावणअनेक प्रकार की मायावी विद्या जानते थे, तो रावण के दस सिर और बीस हाथों को भी कृत्रिम माना जा सकता है। जैन मत के अनुसार रावण राक्षस नहीं बल्कि विद्याधर था जिसके कारण उसके पास जादुई शक्तियां थी।