समाजवादी पार्टी के वोटरों के बिखराव पर विपक्ष की नजर

नई दिल्ली। राजनीति के गलियारों में उत्तर प्रदेश का जिक्र आते ही गरमाहट खुद आ जाती है। क्योंकि राजनीति के पंडित भी इसी सूबे की गुणा गणित पर केन्द्र की सत्ता को तय करते हैं। सूबे में विधान सभा चुनाव का रण सज चुका है, तारीखों का एलान होने को है। पार्टियां अपनी अपनी तैयारियों में जुटी हैं। लेकिन सूबे सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के गृहयुद्ध के चलते गरम है। पिता-पुत्र का ये संग्राम ठीक चुनाव के पहले विपक्षी दलों को वोटरों को साधने का एक मौका दे रहा है।

सूबे की राजनीति में जातीय समीकरणों और धार्मिक समीकरणों का खासा ही महत्व है। समाजवादी पार्टी के पास सूबे के पिछड़ों साखतौर पर यादव वर्ग के साथ मुस्लिम वर्ग का हमेशा से समर्थन रहा है। सपा के इन्ही वोटरों पर अब विपक्ष की नजर है। क्योंकि इनको साधने से सत्ता की राह आसान हो सकती है। समाजवादी पार्टी के भीतर मचे सियासी कोहराम में बसपा, भाजपा और कांग्रेस अपने तरीकों से वोटरों पर सेंध लगाने की फिराक में हैं।

मुस्लिम वोटरों पर कांग्रेस और बसपा की नजर

मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश कांग्रेस भी कर रही है। 27 साल बाद प्रदेश में अपनी सियासी जमीन तलाशने उतरी कांग्रेस के लिए समाजवादी परिवार का संग्राम एक वरदान साबित हो रहा है। भाजपा से नाराज मुस्लिम वर्ग के वोटरों को सपा की परिवारिक कलह ने दिग्भ्रमित कर रखा है। इसी भ्रम में कांग्रेस इन वोटरों पर डोरे डालने की सोच रही है। क्योंकि इन वोटरों का रूझान एक तरह से सत्ता के करीब किसी भी दल को पहुंचाने का काम कर सकता है।

इस मामले में बसपा भी पीछे नहीं है। समाजवादी परिवार के संग्राम की शुरूआत से बसपा सुप्रीमों ने मुस्लिम समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए अपने राइट हैंड नसीमुद्दीन सिद्दीकी को लगा रखा है। क्योंकि इन वोटरों के दम पर सपा सत्ता के सुख को लेती है। अब बसपा एक बार फिर इन वोटरों को अपने खेमे में लाकर 2017 के चुनावी रण को जीतना चाह रही है। इस बारे में लगातार बसपा अपने कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। चुनावी रण के पहले ये दोनों दलों की नजर मुस्लिम वोटरों पर है।

पिछड़ों को साधने में लगी भाजपा और कांग्रेस

प्रदेश के पिछड़ों के पास समाजवादी पार्टी में मचे घमासान और वोटरों की स्थिति को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों का पिछड़ों को अपने खेमे में लाने का पूरा ध्यान है। भाजपा पिछड़ों को साधने के लिए पार्टी में कार्यकारणी से लेकर टिकटों में भी बड़ा फेरबदल करने की सोच रही है। प्रदेश के चुनावी रण में भाजपा पिछड़े वर्ग के वोटरों को साध कर सत्ता की सीढ़ी की ओर जा सकती है। इसी फिराक में पिछड़ों को साधने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। वो भी अपने खेमे में पिछड़ा वर्ग को लाने के लिए नये प्रपोजल को लेकर आने की फिराक में है।

फिलहाल सूबे में समाजवादी परिवार में मचे सियासी संग्राम में विपक्षी दल सपा के वोटों पर सेंध लगाने के साथ अपनी गणित बैठाने में लगे हैं। क्योंकि वोटों के बिखराव का किसी को फायदा तो वोटों के ट्रांस्फर से किसी को लाभ होने वाला है। ठीक चुनाव के पहले सपा के इस संग्राम का असर तो पड़ेगा ही। अब देखना है कि संग्राम के थमने के बाद जनता में आखिर मैसेज क्या जाता है। फिर इस मैसेज का क्या प्रभाव पड़ता है वो तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

अजस्रपीयूष