यूपी: परिवर्तन रथयात्रा के जरिए भाजपा सत्ता में आने की जगायेगी अलख

लखनऊ। सूबे का सियासी पारा गरम है। हर एक पार्टियां अब चुनावी गणित में लगी हैं। कांग्रेस ने यात्रा और खाट पंचायत के जरिए अपनी चुनावी यात्रा का आगाज़ किया तो अखिलेश ने सपा की समाजवादी रथयात्रा से शुरूआत की। अब आज भारतीय जनता पार्टी अपने चुनावी समर का अधिकारिक आगाज़ परिवर्तन यात्रा रथ के जरिए पश्चिम उत्तर प्रदेश से कर रहा है। इस परिवर्तन यात्रा का आगाज़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहारनपुर से एक बड़े कार्यक्रम के जरिए करेंगे।

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क्या है परिवर्तन यात्रा का प्रारूप
भाजपा अपने इस चुनावी समर का आगाज़ प्रदेश की चारों दिशाओं से कर रही है। शनिवार को सहारनपुर से अमित शाह की अगुवाई में शुभारंभ होगा। इसके बाद रविवार को झांसी से अमित शाह राजनाथ सिंह केशवप्रसाद मौर्य उमा भारती इसे यात्रा को रवाना करेंगे। मंगलवार को सोनभद्र और बधुवार को बलिया से ये यात्रा चलेगी। परिवर्तन यात्रा का रथ गांव-गांव चौपालों परिवर्तन यात्रा के सारथी भाजपा के लिए चुनावी माहौल तैयार करेंगे।

किस रणनीति पर होगा काम
परिवर्तन यात्रा के रथ के जरिए अब भाजपा गांव-गांव में चौपालों के जरिए हिदुत्व, राष्ट्रीयता के मुद्दों के साथ केन्द्र की मोदी सरकार की जन योजनाओं की चर्चा भी परिवर्तन रथ के सारथी गांव-गांव तक पहुंचायेंगे। सर्जिकल सट्राइक के बाद लोगों में बढ़ा मोदी सरकार का क्रेज इस परिवर्तन यात्रा के जरिए भुनाने की कोशिश भी परिवर्तन यात्रा के जरिए भाजपा करेगी। इस यात्रा को प्रदेश के चारों दिशाओं से भाजपा शुरू कर इसका अन्त लखनऊ में एक बड़े कार्यक्रम के साथ करेगी।

इसके साथ स्थानीय मुद्दों के लेकर चलेगी यात्रा
परिवर्तन रथयात्रा का उद्देश्य भाजपा को यूपी की राजनीति में सत्ता पर काबिज करना होगा। इसके लिे गांव, शहरों और कस्बों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा और परिवर्तन रथ को इस दिशा में लगाया जा रहा है कि वे क्षेत्र के अहम स्थानीय मुद्दें को जनता के बीच उठाएं इसके साथ ही वे मौजूदा सरकार की जिन मुद्दें पर कमजोर पकड़ रही हो उसे जनता के बीच लाकर अपने विपक्षी दलों पर लगाम कस उन्हें अपनी रणनीति के जरिए चुनाव के पहले जनता के बीच नकारने के दांव चलेगी। इसके लिए भाजपा ने कैराना प्रकरण, मथुरा का जवाहर बाग,बिसाहड़ा कांड,मुजफ्फरनगर दंगा, आतंकियों की रिहाई, सांप्रदायिक बवाल, कानून व्यवस्था की खस्ता हालत के साथ खनन, विद्युत आपूर्ति, बेरोजगारी, दलितो पर अत्याचार, किसान समस्या, व प्रदेश में सपा-बसपा के शासन काल के दौरान जनता के साथ खड़ी हुई समस्याओं को इन दोनों दलों के खिलाफ पार्टी हथियार बनाकर इस्तेमाल करेगी।

किस तरह जनता के बीच होंगे यात्रा के सारथी
इस पूरी यात्रा में पार्टी ने युवा मोर्चा के साथ पार्टी के युवा नेताओं की एक टीम तैयार की है । यह टीम मंडल, जिला और क्षेत्र स्तर पर बनाई गई है। इस यात्रा के लिए सारथी के तौर पर इनको गहन प्रशिक्षण दिया गया है। भाजपा ने इस यात्रा के लिए हर एक क्षेत्र में तकरीबन 2500 कार्यकर्ताओं को लगाया है। पूरे सूबे में 15 हजार परिवर्तन रथ के सारथी के रूप में ये कार्यकर्ता हफ्ते भर में भाजपा के चुनावी रण के अखाड़े को तैयार करेंगे। इस दौरान ये तकरीबन 50 चौपालें लगाएंगे।

विपक्ष पर क्या होगी रणनीति
परिवर्तन यात्रा के पहले भाजपा ने अपने गहन सर्वे के जरिए यात्रा के बीच में पड़ने वाले गांवों शहरों कस्बों में भाजपा की विचारधारा से जुड़े लोगों की एक लिस्ट तैयार कर रखी है। अब भाजपा इन लोगों के जरिए अपनी परिवर्तन यात्रा के सारथीयों के माध्यम से उन गांवों कस्बों में अपनी चौपाल के माध्यम से विपक्षी दलों पर और उनकी रही सरकारों की नीतियों पर निशाना साधेंगे। यात्रा का पूरा जोर 14 साल के सपा बसपा के शासन पर होगा। जहां बसपा सरकार के घोटालों और भ्रष्टाचार को ये साऱथी हथियार बना बसपा पर चलायेंगे वहीं गुंडागर्दी और अराजकता के माहौल के साथ भ्रष्टाचार को हथियार बना सपा पर वार करेंगे।

कैसे दिखेंगे यात्रा के सारथी
भारतीय जनता पार्टी के चुनावी समर के आगाज़ के अहम किरदारों के गणवेश को लेकर भी पार्टी ने एक प्रारूप तैयार किया है। सारथी भगवा टी-शर्ट में होंगे। ये रास्ते में पड़ने वाले गांवो, कस्बों मे लगी महापुरूषों की प्रतिमाओं पर साफ-सफाई के साथ अपनी यात्रा के पडाव में होने वाली चौपालों और कार्यक्रमों की साज-सज्जा खुद तैयार करेंगे। यात्रा की संध्या बेला में सारथी मशाल जलूस के जरिए लोगों में सत्ता परिवर्तन कर भाजपा को लाने की अलख जगाएंगे।

piyush-shukla(अजस्र पीयूष शुक्ला)