समाजवादी परिवार में ‘रामलीला’ के बाद ‘महाभारत’ !

लखनऊ। समाजवादी कुनबे में मची रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही। शुक्रवार को सपा के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने सपा के जिला महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों की बैठक में भले ही कहा हो कि अखिलेश ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे लेकिन समाजवादी परिवार में सत्ता को लेकर छिड़ी जंग थम नहीं रही।

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अखिलेश कहें तो छोड़ दूं पद

शिवपाल ने सपा परिवार में छिड़ी जंग में गेंद अखिलेश के पाले में डाल दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि अखिलेश कहेंगे तो मैं आज ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी उन्हें सौंपने को तैयार हूं। जहां शिवपाल यादव के इस रुख से एक ओर समाजवादी पार्टी की अंदरूनी आपसी तकरार कुछ हद तक थमती तो नज़र आरही है, तो वहीं दूसरी ओर शिवपाल की इस बात से ये साफ हो गया है कि समाजवादी पार्टी में काफी कुछ अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी अपने ‘घरेलू संग्राम से उबरने की कोशिश तो कर रही है।

अखिलेश ने की आवास पर बैठक

शिवपाल की बैठक के बाद अखिलेश ने अपने आवास पर सपा के जिला महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों की बैठक आहुत की । इसके साथ ही शिवपाल के साथ हुई पार्टी की बैठक में भी मुख्यमंत्री अखिलेश नहीं पहुंचे। उन्होंने अपने आवास पर बैठक बुलाया सपा के जिला महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों से मुलाकात कर समाजवादी रथयात्रा की रणनीति पर चर्चा की और प्रदेश में समाजवादी पार्टी का लोगों में क्या रूझान है। इस पर भी चर्चा की।

अखिलेश की नाराजगी

सपा में कौमी एकता दल के विलय को लेकर अखिलेश खासा नाराज हुए थे। जिसके बाद कार्रवाई की झड़ियां लगा दी थीं। लेकिन अब उनके समर्थकों की माने तो अखिलेश की नाराजगी तब तक दूर नहीं होगी जब तक सत्ता की कमान पूरी तरह अखिलेश के पास नहीं आ जाती। पार्टी के कुछ नेताओं का ये भी कहना है कि अखिलेश चाहते हैं कि पार्टी से बाहर किए गये उनके करीबी युवा नेताओं को पार्टी में शामिल किया जाये साथ ही टिकट के बंटवारे में उनकी राय के बिना कोई फैसला ना लिया जाये।

मुलायम से मिले बड़े नेता

प्रदेश के समाजवादी परिवार में मची रार को अब खत्म करने के लिए आगे आये 5 बड़े समाजवादी चेहरों ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा की। इस बड़े नेताओ में बेनी प्रसाद वर्मा, रेवती रमण सिंह, नरेश अग्रवाल, किरणमय नंदा शामिल रहे। सपा परिवार में लगातार एक के बाद एक पर्त दर परत कलह के बादल मड़राते जा रहे हैं। जिसके चलते आगामी विधान सभा चुनावों में सपा को होने वाले नुकसान को लेकर पार्टी के नेता बहुत परेशान हैं। इसी वजह से आज सपा सुप्रीमो से मुलाकात करके उन्होने इस मसले पर अपनी बात रखी।

फिलहाल इस बैठक में बेनी प्रसाद वर्मा, रेवती रमण सिंह, नरेश अग्रवाल, किरणमय नंदा आशु मलिक, माता प्रसाद पांडेय और शिवपाल यादव भी मौजूद रहे। तकरीबन एक घंटे तक चली इस बैठक में किसी मसले पर कोई साफ हल अभी तक नहीं निकल पाया है। दूसरी तरफ नेताओं का लगातार कहना है परिवार में कोई विवाद नहीं है।

अखिलेश ने तैयार किया रोड मैप

फिलहाल सूत्रों की माने तो अखिलेश ने अकेले दम पर ही पार्टी से इतर अपने चुनावी आगाज का फैसला कर लिया है। जिसके तहत वो अब अकेले ही समाजवादी रथयात्रा लेकर प्रदेश के दौरे पर 3 नवम्बर से जा रहे हैं । जिसकी व्यापक तैयारियों को लेकर वो पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों के साथ मीटिंग करने वाले है। कल उन्होंने इसी क्रम में पार्टी के जिला महानगर अध्यक्षों एवं महा सचिवों से मुलाकात कर समाजवादी रथयात्रा की रणनीति पर चर्चा की।

नहीं करेंगे अपने फैसलों से समझौता

अखिलेश अब पार्टी और अपने करीबियों के हितों से कोई समझौता करने के फिराक में नहीं दिख रहे हैं। इसी राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के प्रयास में लगातार पूरा समाजवादी कुनबा लगा हुआ है। अखिलेश का समाजवादी रथयात्रा अकेले ही निकालने का फैसला और रविवार को पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों के साथ बैठक कर अपनी रणनीति तय करने की बात ने ये साफ किया है कि वह तक तक नरम नहीं होंगे जब तक उनकी शर्तें नहीं मानी जाएंगी।अखिलेश ने पार्टी से बाहर किए गये अपने करीबी नेताओं की पार्टी में वापसी और टिकट के बंटवारे में हिस्सेदारी की मांग की है।

गायत्री प्रजापति से मिलने से किया इनकार

वहीं अखिलेश के तेवर शांत होते नहीं नजर आ रहे हैं।इसी बीच खबरें आ रही हैं कि आगामी 25 तारीख को होने वाले पार्टी के रजत जयंती कार्यक्रम का जिम्मा अखिलेश सरकार के मंत्री गायत्री प्रजापति को सौंपा गया है। शायद इसी सन्दर्भ में मंत्री गायत्री प्रजापति मुख्यमंत्री से मिलना चाह रहे थे पर अखिलेश ने मिलने से साफ इनकार कर दिया है।

piyush-shukla(अजस्रपीयूष,संवाददाता)